डेविस कप भारत के लिए हमेशा से ही पहेली की तरह रहा है। भारत इस पहेली को सुलझाने में हर बार चूक जाता है। डेविस कप एक टीम टूर्नामेंट है। इसमें सामूहिक प्रदर्शन से आगे का सफर तय होता है। भारत के लिए डेविस कप संभावनाओं वाला टूर्नामेंट रहा है। भारत इसमें 100 से भी ज्यादा वर्षों से भाग ले रहा है। तीन बार—1966] 1974 और 1987 में—भारत फाइनल तक पहुंच चुका है, परंतु एक बार भी खिताब नहीं जीत पाया। भारत उन दिनों भी फाइनल में पहुंचा है, जब भारत के सितारा खिलाड़ी एटीपी रैंकिंग में कोई ज्यादा बड़े खिलाड़ी नहीं थे। भारत हमेशा डेविस कप के विश्व ग्रुप के आसपास घूमता रहा है।
इस बार भारत का प्रदर्शन उम्मीद से भरा था, लेकिन थोड़ी सी चूक के कारण अंतिम आठ में जगह नहीं बना पाया। क्वालीफायर के दूसरे दौर में दक्षिण कोरिया से 3-1 से हार गया, लेकिन इस साल के प्रदर्शन से भारत अगले साल के लिए एक नई उम्मीद छोड़ गया है।
इस साल की शुरुआत में नीदरलैंड के विरुद्ध शानदार प्रदर्शन से भारत की उम्मीदें आसमान पर थीं। युवा खिलाड़ी दक्षिणेश्वर सुरेश के दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने नीदरलैंड को 3-2 से पराजित कर ड्रॉ जीत लिया। सुरेश ने नीदरलैंड के 88वीं वरीयता प्राप्त जेस्पर डी जोंग को हराया और अपने सभी तीनों मैच जीते। यह जीत बड़ी थी, क्योंकि नीदरलैंड को मजबूत टीम माना जाता है। ऐसे में भारत के फाइनल में जाने की संभावनाएं बढ़ गई थीं। अगला मुकाबला दक्षिण कोरिया से तय होने के बाद भारत कहीं ज्यादा उम्मीद करने लगा था।
दक्षिणेश्वर सुरेश के कमाल के प्रदर्शन से भारत की टीम मजबूत नजर आ रही थी, लेकिन क्वालीफायर-2 शुरू होने से पहले ही यूकी भांबरी के चोटिल होने से भारत के गैर-खिलाड़ी कप्तान रोहित राजपाल के माथे पर शिकन की रेखाएं खिंच गई थीं। सुमित नागल और सुरेश के चलते भारत ने उम्मीदें बांध रखी थीं।
सुमित नागल ने अपने एकल मुकाबले में जोरदार शुरुआत की थी और एक समय 4-0 से आगे थे लेकिन नागल अपने खेल में निरंतरता नहीं रख पाए और एकल मैच हार गए। सुरेश ने भी अपने एकल मैच में सुनवू क्वोन को टक्कर दी लेकिन सुनवू ने अपनी रणनीति बदलकर मैच खेला और सुरेश मैच खो बैठे।
पहले दोनों एकल हारने के बाद भारत के हौसले वैसे ही टूट गए थे और यूकी भांबरी के नहीं होने से टीम दबाव में थी। लेकिन युगल में सुरेश ने एन श्रीराम बालाजी के साथ मिलकर दक्षिण कोरिया की जोड़ी को 6-3] 3-6 और 6-3 से हराकर भारत को फिर जिंदा कर दिया। लेकिन रिवर्स सिंगल में सुमित नागल सुनवू के सामने टिक नहीं पाए और आसानी से हार गए। इस हार के साथ ही भारत यह ड्रॉ 3-1 से हार गया।
अब भारत को एक बार फिर क्वालीफायर खेलना होगा। वर्ष 2027 में एक बार फिर क्वालीफायर में भारत का मुकाबला नीदरलैंड से होगा। भारत एक बार फिर नीचे की सीढ़ी पर फिसल गया है।
दक्षिण कोरिया के विरुद्ध भारत को बहुत उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के विपरीत रहा। यूकी भांबरी के चोटिल होने से भारत दबाव में आ गया था। हालांकि युगल मैच भारत ने जीता, लेकिन एकल मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी टिक नहीं पाए। सुमित नागल का फॉर्म नहीं पकड़ पाना भी एक कारण रहा।
सबसे बड़ा कारण मैच का दक्षिण कोरिया में होना था। इस कारण सारी परिस्थितियां उसके पक्ष में थीं। हार्ड कोर्ट पर बॉल स्लो आ रही थी, जिसका फायदा मेजबान को मिला। कोरियाई खिलाड़ियों द्वारा मैच के अनुसार रणनीति बनाना भी भारत की हार का कारण रहा। भारतीयों के खेल में निरंतरता नहीं थी। इस कारण वे मैच में अपनी मजबूत स्थिति को अंत तक नहीं बना पाए और मैच खो दिए।
दक्षिणेश्वर सुरेश अपने से ज्यादा रैंकिंग वाले कोरियाई खिलाड़ियों का दबाव कम नहीं कर पाए। गैर-खिलाड़ी कप्तान को चाहिए था कि वह टीम को मानसिक रूप से मजबूत करते। नीदरलैंड के विरुद्ध मिली जीत के हौसले को टीम में बनाए रखना जरूरी था। कप्तान को टीम के मनोबल को बनाए रखना था।
डेविस कप में भारतीय टीम का गौरवशाली इतिहास रहा है। 1974 के फाइनल में भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति के विरोध में भारत ने इस मैच का बहिष्कार किया, जिसके कारण दक्षिण अफ्रीका को विजेता घोषित कर दिया गया। 1987 के फाइनल में स्वीडन के विरुद्ध भी भारत एक भी मैच नहीं जीत सका और बाहर हो गया।
लिएंडर पेस भारत के सबसे सफल डेविस कप खिलाड़ियों में रहे हैं। भारत के शानदार रिकॉर्ड को देखते हुए इस बार भी भारत से उम्मीद थी, लेकिन उम्मीदें परवान नहीं चढ़ सकीं। भारत के लिए दूसरे देश की मेजबानी में उनके कोर्ट पर खेलना बहुत बड़ी चुनौती थी। दक्षिण कोरिया ने अपनी सुविधा के अनुसार कोर्ट चुने, जिसका फायदा उसे मिला।
नीदरलैंड के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन करने वाले सुरेश ने यहां भी प्रदर्शन ठीक किया, लेकिन एकल मैच में जीत नहीं पाए। यहां युगल में उनका प्रदर्शन सफल रहा।
अगले साल के लिए भारत को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। गैर-खिलाड़ी कप्तान रोहित राजपाल का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। टीम भी नए सिरे से बनेगी। टेनिस प्रबंधकों को एक लक्ष्य बनाकर खिलाड़ियों को तैयार करना होगा, ताकि आने वाले मैचों में भारतीय टीम को जीतने में कोई दिक्कत न हो।
डेविस कप में भारत जीत सकता है। जरूरत है थोड़ी सामूहिक कोशिश की। दूसरे देश की मेजबानी में अपने प्रदर्शन को सुधारना होगा। इसके लिए मैच से पहले कोर्ट और विरोधी टीम के खिलाड़ियों का अध्ययन करना होगा ताकि सभी चीजें सामने होने पर रणनीति आसानी से बनाई जा सके।
फिलहाल यह ड्रॉ तो भारत चूक गया है। अब अगले साल पर लक्ष्य है और उम्मीद है कि अगला साल भारत के लिए सफलता लेकर आएगा।
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सीताराम गेट के सामने] बीकानेर
9413769053

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