Wednesday, January 31, 2024

खेलो इंडिया से कितना खेला इंडिया

 


देश में सालो तक खेलो के राष्‍ट्रीय स्‍तर के बडे आयोजनो में राष्‍ट्रीय खेल सबसे उपर रहे है। राष्‍ट्रीय खेल के आयोजन में अंतराल आता रहा है परन्‍तु इस समय देश में खेलो इंडिया की धूम है। भारत सरकार का यह कार्यक्रम युवाओ में खासा लोकप्रिय हो रहा है। इसी के तहत तमिलनाडु की मेजबानी में खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स का छठा संस्‍करण आयोजित किया गया जिसमे देश भर के ५६०० से भी ज्‍यादा खिलाडियो ने हिस्‍सा लिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेलो इंडिया देश में खेलो के प्रति युवाओ में विश्‍वास जगाने में कितना बडा काम कर रहा है। युवा इसे अपनी उम्‍मीदो से जोडकर देख रहे है। खेलो इंडिया ने युवाओ को न केवल अवसर प्रदान किये है बल्कि मिलने वाली सुविधाओ में भी ईजाफा किया है।

तमिलनाडु में खेला इंडिया यूथ गेम्‍स का छठा संस्‍करण आयोजित किया गया। इन खेलो मे महाराष्‍ट्र, हरियाणा और तमिलनाडु के एथलीट छाये रहे । खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स २०२३ में महाराष्‍ट्र चैम्पियन बना था। इस बार केआईवाईजी २०२४ में कुल २६ खेलो में ९३३ पदक दांव पर थे जिसमें २७८ स्‍वर्ण पदक, २७८ रजत और ३७७ कास्‍यं पदक शामिल है। स्‍क्‍वेश को पहली बार केआईवाईजी में शामिल किया गया। इसमें ३६ राज्‍यो और केन्‍द्र शासित प्रदेशो की टीमें भाग लेती है। इसमें सबसे बडा दल मेजबान तमिलनाडु का रहा जिसमें ५५९ एथलीट शामिल थे जबकि तीन बार के चैम्पियन महाराष्‍ट्र के दल में ४१५ और दो बार के चैम्पियन हरियाणा के दल में ४९१ एथलीट शामिल थे। हरियाणा छोटा राज्‍य होने के बावजूद दो बार चैम्पियन है जो यह बताता है कि इस राज्‍य में खेलो का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर कितना मजबूत है। केआईवाईजी टीम चैम्पियशिप प्रारूप में खेला जाता है जिसमें एथलीटो द्वारा जीते गये पदक उनसे सम्‍बन्धित राज्‍य या केन्‍द्र शासित प्रदेश की समग्र पदक तालिका में जोडे जाते है और जो टीम सबसे ज्‍यादा पदक जीतती है, उसे प्रतियोगिता का चैम्पियन घोषित किया जाता है।

खेलो इंडिया वर्ष २०१७-१८ में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एथलीटो को जमीनी स्‍तर पर सुविधाऐ और अवसर उपलब्‍ध करान के उद्धेश्‍य से शुरू किया गया। खेलो इंडिया भारत सरकार की युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजना है। इसके अन्‍तर्गत खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्‍स और खेलो इंडिया विंटर गेम्‍स आयोजित किये जाते है। इससे जुडे खिलाडियो को खेला इंडिया एथलीट के रूप में पहचान मिली है। इससे निकले ३००० से ज्‍यादा एथलीट भारतीय खेल प्राधिकरण के विभिन्‍न केन्‍द्रो पर प्रशिक्षण प्राप्‍त कर रहे है। इस प्रशिक्षण  में उपकरण , आहार और शिक्षा हेतु सहायता के अतिरिक्‍त १०,००० रूपये भत्‍ता दिया जाता है। खेलो इंडिया भारत में खेलो के विकास के लिए महत्‍ती भूमिका निभाता हुआ दिख रहा है। एशियाई खेलो में भारत की पदक तालिका तीन अंको में पहुंचाने में कहीं न कहीं खेलो इंडिया का योगदान है। भारतीय एथलीटो ने एशियाई खेलो में जिस प्रकार का खेल और जज्‍बा दिखाया वो खेलो इंडिया के कारण ही संभव हो सका है। भारतीय एथलीटो को दिया गया प्रशिक्षण मैदान में उनके प्रदर्शन से दिख रहा है। राष्‍ट्रकुल खेलो और ओलम्पिक  में भी भारतीय एथलीटो का प्रदर्शन पूर्व के प्रदर्शनो से काफी बेहतर रहा है। इसके लिए भारतीस एथलीटो ने मिली सुविधाओ का खूब लाभ उठाया जो उनकी सफलता में दिखाई दिया।

खेलो इंडिया योजना युवाओ के बीच लोकप्रिय होती दिख रही है। युवाओ को निश्चित रूप से इससे अवसर प्राप्‍त हुए है। खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्‍स के अलग अलग आयोजन होने से युवाओ के लिए अवसर बढे है। खेलो का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर पहले से बेहतर हुआ है परन्‍तु अभी भी इस क्षेत्र में काम की जरूरत है। ठेठ ग्रामीण स्‍तर तक खेलो के इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को बेहतर बनाने की आवश्‍यकता है। कई गांवो में खेल प्रतिभाऐं है परन्‍तु इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के अभाव में ये प्रतिभाऐ उभरने से पहले ही खत्‍म हो जाती है। सोशल मिडिया के जरिये कई बार गांव की लडकियो को अपने गांव मे खेलो में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन में करते हुए देखा जा सकता है। किसी भी बडे प्रतिभा खोज तलाश कार्यक्रम में प्रतिभाऐं गांव में ही मिलती है। तीरंदाज लिम्‍बाराम ठेठ गांव की ही प्रतिभा थी। देश की कई यूनिवर्सिटीज में भी खेल सुविधाओ और साधनो का अभाव है इस कारण प्रतिभाशाली खिलाडी आगे बढने का सपना वहीं खत्‍म कर देते है। खेलो इंडिया के माध्‍यम से अंतिम छोर तक खेल सुविधाओ का विस्‍तार करने की आवश्‍यकता है।

खेलो इंडिया योजना के तहत स्‍थानीय खेलो को भी महत्‍व दिया जा रहा है जिसमें गतका, कलारीपयटु और मलखम्‍ब शामिल है। खेलो इंडिया से निश्चित रूप से इंडिया खेला है और काम्‍याबी के सा खेला है। अभी खेलो इंडिया को पांच से सात साल ही हुए है। अभी जो परिणाम मिले हुए उसे शुरूआती माने जा सकते है परन्‍तु अगले पांच वर्षो में बडे परिणामो की दरकार रहेगी। हाल के परिणामो से माना जा सकता है कि खेलो इंडिया अपने उद्धेश्‍यो में सफल हो रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स की लोकप्रियता जिस प्रकार से बढी है उससे युवाओ खेलो की तरफ आकर्षित हुए है। तमिलनाडु में इन खेलो का जारेदार आयोजन हुआ और सबसे बडी बात इसमें लगभग सभी राज्‍यो और केन्‍द्र शासित प्रदेशो की टीमो ने भाग लिया। 

खेलो इंडिया की सफलता और बडी हो जायेगी तब अंतिम छोर तक खेल सुविधाऐं पहुंच जायेगी। फिलहाल खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स अपने छठे संस्‍करण में ही सफल है परन्‍तु यह भी सच है कि पहले पांच प्रदेशो की टीमो के स्‍वर्ण पदको की संख्‍या दहाई तक पहुंच सकी है। इस पदक तालिका से पता लगाया जा सकता है कि खेलो में कहां पर और अधिक ध्‍यान देने की जरूरत है। खिलाडियो का जोश और खूमार खेलो इंडिया के ध्‍वज वाहक है।

--------

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर ९४१३७६९०५३

Wednesday, January 3, 2024

नये अवसरो का साल है २०२४


 


नया साल हमेंशा नयी उम्‍मीदें लेकर आता है। हर क्षेत्र में नये साल में लोग नयी उर्जा के साथ काम में लगते है। खेलो में तो हर एक नया दिन नयी उर्जा के साथ आता है। इस बार खेलो के लिए साल २०२४ पिछले साल की गल्तियो को सुधारने का अवसर लेकर आया है। जो मौके हम २०२३ में चूक गये थे उन मौको को सुधारने का अवसर लेकर आया है नया साल। पिछले साल भारत को बहुत सारे खेलो में पूरी दुनिया में छा जाने का अवसर था। भारत के पास इन खेलो में विश्‍व चैम्पियन बनने का अवसर था। भारत इन खेलो में दुनिया की सबसे बडी ट्रॉफी अपने नाम कर सकता था परन्‍तु हमारे खिलाडी अंतिम अवसर पर चूक गये थे। भारतीय उस समय अपने लक्ष्‍य से चूक गये जब तीर निशाने पर लगने वाला था। भारतीय अपने देशवासियो की उम्‍मीदो को संभाल नहीं पाये और देश की उम्‍मीदे धराशायी कर दी। अब नया साल उन चूके गये अवसरो को वापिस लेकर आया है। ऐसा बहुत कम होता है कि एक साल चूक जाने पर अगले ही साल आपको वापिस   अवसर मिलता है। साल २०२४ उम्‍मीदो को साल है। साल २०२४ हारी हुई बाजी जीतने का साल है।

बात करे क्रिकेट की तो पिछले साल हमने बहुत सारे मौके गंवाये है। पिछले साल वनडे विश्‍वकप में आस्‍ट्रेलिया के हाथो फाईनल की हार कई साल तक सालती रहेगी। वनडे विश्‍वकप भारत में हुआ था लिहाजा भारत के लिए उम्‍मीदे भी ज्‍यादा थी और अवसर भी। परन्‍तु भारतीय पूरे टुर्नामेंट में सिकन्‍दर की तरह खेलने वाले अंतिम क्षणो में उम्‍मीदे और अवसर दोनो गंवा बैठे। इससे पहले विश्‍व टेस्‍ट चैम्पियपनशिप में भारत लगातार दूयरी बार फाईनल में पहुंचा था और यहां भी भारत से उम्‍मीदे थी क्‍योंकि टेस्‍ट क्रिकेट में भारत शीर्ष पर था। लगभग हर टीम को हरा चुका था। यहां भी भारतीय अंतिम क्षणो में चूक गये और फाईनल में आस्‍ट्रेलिया से हार गये। टेस्‍ट चैम्पियपनशिप के फाईनल में हारना क्रिकेट की सबसे बडी हार थी। साल २०२३ में क्रिकेट में भारत के लिए दुनिया का सिरमौर बनने के दो अवसर थे और दोनो ही अवसर भारत ने आखिरी दौर में गंवा दिये। नया साल भारत के लिए अवसर वापिस लाया है। साल २०२४ में जून में अमेंरीका और वेस्‍टंडीज में टी २० विश्‍वकप होगा। भारत के लिए मौका है कि भारत इसे जीत कर पिछले साल गंवाये अवसरो को वापिस सफलता में बदल दे। टी २० विश्‍वकप से पहले भारत को बहुत सारे टी २० और आईपीएल खेलने का अवसर मिलेगा जो टी २० विश्‍वकप में भारत के लिए बुस्‍टर का काम करेगा। इसके अलावा विश्‍व टेस्‍ट चैम्पियनशिप का नया सीजन भी २०२४ मे शूरू होगा और भारत को साल के शुरू में ही ईग्‍लैण्‍ड के साथ ५ मैचो की सीरीज भी खेलनी है। भारत विश्‍व टेस्‍ट चै‍म्पियनशिप का शानदार आगाज कर फाईनल में स्‍थान बनाने के लिए शुरूआत में ही शीर्ष पर पहुंच सकता है। इस प्रकार क्रिकेट में भारत के लिए साल २०२३ में गंवाये अवसरो को वापिस भुनाने के मौके है। भारत के पास साल २०२४ में भी विश्‍व चैम्पियन बनने के मौके है।

बैडमिंटन में साल २०२३ में भारत को अवसर तो मिले परन्‍तु क्रिकेट की तरह अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सके। साल २०२२ में गंवाये गये मौको को वो २०२३ में भुना नही सके परन्‍तु पुरूष बैडमिंटन में भारत की चुन्‍नौत्ति युवा शटलरो में मजबूत की। भारतीयो ने टुर्नामेट भी जीते है। साल २०२२ में भारत के लक्ष्‍य सेन आल ईग्‍लैण्‍ड बैडमिंटन में फाईनल तक पहुंचे थे परन्‍तु फाईनल जीत कर पूवर् भारतीयो की सफलता को दोहरा नही सके थे। २०२३ में लक्ष्‍य सेन और किदाम्‍बी श्रीकांत ने अच्‍छा प्रदर्शन किया। लक्ष्‍य सेन साल २०२२ के प्रदर्शन को २०२३ में दोहरा नही सके थे। क्रिकेट की तरह बैडमिंटन में भी खिलाडियो के पास २०२४ में पिछले अवसरो को वापिस भुनाने का अवसर है। इस साल आल ईग्‍लैण्‍ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में भारतीयो के पास फाईनल में पहुचने और जीतने के अवसर है। साल २०२२ में गंवाया अवसर अब वापिस मिल रहा है और इसे भुनाकर एक बार फिर बरसो बाद भारतीय बैडमिंटन को शीर्ष पर पहुंचा सकते है। ऐसा इसलिए है कि इस समय भारतीय शटलर पूरी तरह से फॉर्म में है और इसे जीतने की क्षमता भी रखते है। इसलिए भारतीय शटरलर से उम्‍मीदे की जा रही है।

साल २०२३ मे शतरंज में भारत के लिए चमत्‍क्रत होने का अवसर आया था ज‍ब भारत के प्रागनंदा विश्‍व चैम्पियन बनने के करीब थे परन्‍तु अंतिम क्षणो में भारत के युवा प्रागनंदा अनुभव मैग्‍नस कार्लसन से हार गये थे। इस विश्‍व चैम्पियनशिप के शुरू में तो भारतीयो का ध्‍यान इस ओर नहीं गया था जब प्रागनंदा ने चाले चलनी शुरू की तो इसकी धमक पूरी दुनिया में सुनायी देने लगी और फाईनल तक आते आते पूरा देश विश्‍व चैम्पियन बनने की दुआ करने लगा परन्‍तु युवा ग्राण्‍ड मास्‍टर कराडो उम्‍मीदो का बोझ सहन नहीं कर पाये और चैम्पियन बनने से चूक गये। परन्‍तु साल २०२४ में प्रागनंदा के पास एक और अवसर है। अप्रेल में फिर विश्‍व शतरंज चैम्पियनशिप हो रही है जिसमें प्रागनंदा साल २०२३ में गंवाये अवसरो को वापिस भुना सकता है। भारत के पास वैसे तो कई शातिर है परन्‍तु युवा ग्राण्‍ड मास्‍टर के पास अलग तरह की चाले है। उनकी इन चालो को देखकर दुनिया भर के विशेषज्ञ उन्‍हे भविष्‍य का चैम्पियन मानते है। साल २०२४ में उनके पास अवसर है कि वो दुनिया के सिरमौर शातिर बन सकते है। भोले भाले प्रागनंदा से पूरी भारत को नये साल में उम्मीदे है।

क्रिकेट, बैडमिंटन और शतरंज में ही नही दूसरे खेलो में भी भारत को नये साल में नये अवसर है। टेनिस में भारत को पाकिस्‍तान के साथ डेविस कप खेलना है। भारत डेविस कप में विश्‍वग्रुप में पहुंचने से काफी दूर हो गया है। भारत को इस साल पाकिस्‍तान में डेविस कप खेलने की अनुमति मिलती है तो भारत यहां जीत हासिल कर विश्‍वग्रुप के और करीब जा सकता है। एथलेटिक्‍स में नीरज चौपडा ने पिछले साल स्‍वर्णिम प्रदर्शन किया और नये साल में भी उनके पास अपना प्रदर्शन जारी रखने का अवसर है। पूरे भारत के लिए इस साल होने वाले ओलम्पिक्‍स में भारत को कई ज्‍यादा पदको की उम्‍मीदे है। भारत को इस बार पदको का आंकडा ऐतिहासिक रूप से बढने की उम्‍मीद है। सभी खेलो में २०२३ में चुके गये अवसरो के बाद साल २०२४ में ओलम्पिक के रूप में बहुत सारे अवसर मिल रहे है। भारतीय इन अवसरो केा जरूर भुनायेंगे ऐसी उम्‍मीद है।

साल २०२३ में अवसर कम थे और जो भी अवसर मिले उनमें भारतीयो ने शानदार प्रदर्शन किया परन्‍तु कुछ खेलो में अंतिम समय पर चूक गये थे। इस साल भारत के पास ओलम्पिक्‍स के रूप में बहुत सारे अवसर है। भारत २०२४ में खेलो में नयी ईबारत लिख सकता है। इसलिए भारत नये साल का स्‍वागत नयी उम्‍मीदो आैर उर्जा के साथ कर सकता है।

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर ९४१३७६९०५३

Monday, December 25, 2023

इस साल की सिमटी हुई ये घड़ियां


 

इस दिसम्‍बर में जाडे इतने ठिठुराने वाले नहीं है जितने कि पिछले सालो में हुआ करते थे। पांच साल पहले दिसम्‍बर में इतनी ठंड थी कि भोर में बाहर निकलने पर पूरा शरीर ढक कर निकलते थे। केवल और केवल हमारी आंखे ही बिना ढके रहती थी। आंखो पर भी चश्‍मा लगा लेते या हेलमेट के कांच से ढक लेते थे। इन जाडो में अभी तक ऐसी ठंड का अहसास नही हुआ है। आज सुबह अपने कमरे से निकला तो कमरे के बाहर पीली चमकती हुयी धूप बिछी हुई थी। दीवार पर बने घोसेले से कबूतर के बच्‍चे निकल कर धूप में आ गये थे। वे अपने पंख फैला कर पूरे बदन को धूप में सेक रहे थे। वे उड नही पा रहे थे। अभी उडने में थोडा समय है। साल का भी ऐसा ही है। पहले लगता है कि धीरे बहुत जा रहा है फिर एकदम से उड जाता है। साल २०२३ ऐसा ही था। अभी तो हम २०२३ लिखना सीखे थे कि वो हमारे हाथो से फिसल गया। लेकिन फिसलते हुए भी बहुत सारी मीठी यादे दे गया। इस साल आप लोगो कार भरपूर प्‍यार और स्‍नेह मिला। मेरे काम को आपने सराहा। इस साल वो भी मिला जो अब तक अधुरा था। वो पूरा नही मिला है। मन यही कहता है कि

अजीब है दिल के दर्द

यारो न हो तो  मुश्किल है जीना इसका

जो हो तो हर दर्द एक हीरा एक गम नगीना इसका।

इस साल के शुरू मे ही मेरी किताब मोळियो आयी। राजस्‍थानी भाषा की यह किताब आलोचको द्वारा एक तरह से रौंद दी गयी परन्‍तु पाठको का भरपूर प्‍यार मिला। एक शादी समारोह में एक युवा पिता अपने बच्‍चे को मेरी तरफ अंगुली कर बता रहा था कि ये मोळियो के लेखक है। इससे ही मुझे मेरी किताब का अवार्ड मिल गया। ऐसे ही सैकडो बच्‍चो को मेरी किताब पसंद आयी। एक पिता ने बताया कि उसकी बेटी चाहती है कि मोळियो के लेखक उसकी स्‍कूल में आये। इस प्‍यार से मुझे और ज्‍यादा लिखने की उर्जा मिली। साल के अंत में मेरी डिजीटल ई बुक बी के स्‍कूल की कचौरी आयी। जिसे पूरे देश के पाठको ने भरपूर प्‍यार दिया। ऑन लाईन बिक्री मे लॉंचिग के पहिले दिन ही किताब ने धूम मचा दी थी। जयपुर के एक पाठक ने मुझे फोन कर बधाई दी। सात समंदर पार बसे बीकानेरियो को भी यह किताब बहुत पसंद आयी। कुछ एक ने मेरे ई मेल पर अपना आर्शीवाद भेजा। मेरा दिल आल्‍हादित था। इस किताब ने एक बार फिर मुझे लेखक के रूप में स्‍थापित किया। आकाशवाणी ने इस किताब के लिए मेरा विशेष इंटरव्‍यू प्रसारित किया। इस प्‍यार के बावजूद कुछ लोगो के लिए चाहता था कि मेरी किताब पढे पर उन्‍होने नहीं पढी। उम्‍मीद है नये साल में वो मेरी किताबो केा पढेंगे।


इस साल भी जनसत्‍ता में मेरा कालम प्रकाशन जारी रहा। हर महीने में मेरा एक लेख जनसत्‍ता में प्रकाशित हुआ। कुछ एक लेख और कहानी दूसरे समाचार पत्रो में भी प्रकाशित हुए।

इस साल के शुरू में प्रोग्रेसिव सोसायटी ने मेरे लेखन के लिए मुझे सम्‍मानित किया। वरिष्‍ठ साहित्‍यकार मधु आचार्य ने मुझे सम्‍मानित करते हुए सकारात्‍मकता के साथ नये स्रजन के लिए बधाई दी। श्री लाल मोहता स्म्रति ट्रस्‍ट ने भी इस साल के मध्‍य में मुझे लघु कथा वाचन के लिए आमंत्रित किया। गिरीराज जी भाई साहब और ब्रजरतनजी जोशी ने मुझे सम्‍मान देते हुए मंच पर आसीन किया। मेरी लघुकथाओ को सराहा गया और लेखन के लिए मेरा सम्‍मान भी किया गया। इस साल कई साहित्‍यक कार्यक्रमो में जाना हुआा यह साहित्‍य स्‍वजनो को प्‍यार ही था जिससे कई कार्यक्रमो में भागीदारी भी निभाई। 



यह साल घुमक्‍कडी का भी रहा । इस साल परिवार में साथ ऋषिकेश और देहरादून की घुमाई की। बच्‍चो के साथ दिन मे तीन तीन घंटे गंगा में पडे रहने का सुख जैसा कोई सुख नही। कभी बच्‍चो के साथ पहाडो पर पैदल ही निकल जाता तो कभी झरनो के नीचे घंटो नहाते हुए घुमक्‍कडी का आनंद लिया। इस बार दिल खोलकर फोटो खिंचवाई। इस टुर पर मेरे फोन का सारा स्‍टोरेज खत्‍म हो गया। हमने यात्रा का समापन गिरीराज जी की यात्रा से किया। मथुरा और व्रद्धवन के सुंदर मंदिरो में दर्शन किये।



 पूरे परिवार के साथ भजन गाते और नाचते हुए गिरीराज जी की पदयात्रा की। ऐसी घुमक्‍कडी का आंनद पहले कभी नहीं आया।


यह साल मेरे लिए उत्‍सवो का भी रहा। सारे उत्‍सव दिल खोलकर मनाये। इस बार गणेश उत्‍सव पहली बार मनाया। गणेश चतुर्थी को गणेश की प्रतिमा लाकर स्‍थापित की और अनंत चतुर्दशी के दिन गाजे बाजे के साथ विर्सजन किया। होली के दिन यार दोस्‍तो के साथ खूब रंग खेले। इस बार आफिस में जिला कलेक्‍टर के साथ मस्‍ती के साथ होली खेली। ढोल और चंग की थाप पर साथियो के साथ खूब कदम थिरकाये। इस साल होली से पहले बीकानेर में राष्‍ट्रीय महोत्‍सव हुआ जिसमें जम कर भागीदारी की। इंडियन आयडल विनर सलमान की गायकी का तो जमकर मजा लिया। बीकानेर ने दलेर मेंहदी के प्रोग्राम के बाद पहली बार किसी गायक के गानो पर झूमकर आनंद लिया। दीवाली पर तो रात भर पटाखे चलाये और यार दोस्‍तो के साथ खूब बाते की। दीवाली हमेशा की तरह उल्‍लासित रही।आखातीज को पतंगबाजी का भी खूब आनंद लिया। दिनभर छत्‍तर पर माईक पर बोल बोल अपनी बायड निकाली। पतंगो में भी तरह तरह की पतंगे उडाई और जोर से यह गाते रहे

चली चली रे पतंग मेरी चली रे

चली बादलो के पार होके डोर पे सवार चली रे।  


साल पूरा मस्‍ती भरा रहा और उत्‍सवो के उल्‍लास से सराबोर रहा परन्‍तु एक घटना दहला गयी। इस साल मेरे छोटे साले साहेब किसन कुमार पूरोहित अपने प्रेम तान मे बांधकर हम से बिछुड गया। किसनजी मेरे मित्रवत थे। इस साल के शुरू में तो उनसे मिला था। वो कितनी मुस्‍कुराकर बात कर रहे थे। अपनी बेटी के साथ मस्‍ती कर रहे थे लेकिन इस साल के बीच में ही खबर आयी तो मै स्‍तब्‍ध था।

साल जैसे धीमे पदचापो के साथ जा रहा है वैसे ही नये साल की पदचाप सुनाई देने लगी है। इस साल जिनको जीत नही पाये उनको नये साल में जीतेंगे। नये साल का सूरज क्षितिज पर अपना उजास फैला रहा है। आसमान में भोर की लालिमा छा रही है। झूमते हुए दोस्‍तो के चेहरे इस लालिमा के साथ दिख रहे है। इनमें वो दोस्‍त भी है जिनको जितना बाकि है। नये साल में और ज्‍यादा लिखूंगा और आपको पढाकर परेशान करता रहूंगा। आपका और ज्‍यादा प्‍यार पाने की कोशिश करूंगा। मन कह रहा है।

इस साल में सिमटी हुयी ये घडिया फिर से न बिखर जाये

इस रात में जी ले हम  इस रात मे मर जाये।

----

 


Tuesday, October 24, 2023

ये क्रिकेट है मेरी जान

 

 

मै आज दैनिक भास्‍कर में वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर का एक लेख पढ रहा था जिसमें उन्‍होने क्रिकेट के दर्शको के सैकलुर होने की बात उठायी है। उनका ईशारा भारत पाक मैच के दौरान पाकिस्‍तान बल्‍लेबाज रिजवान के आउट होने पर दर्शको द्वारा जय श्रीराम का नारा लगाने की ओर था। उसी तरह मैने टिवटर पर एक पोस्‍ट देखी जिसमें क्रिकेट की समीक्षा जाति के माधयम से करने के पक्ष मे तर्क दिये गये थे। एक फेसबुक रील में मैने एक क्लिप देखी जिसमें कुछ दर्शक बांग्‍लादेशी दर्शको से उनके प्रतीक शेर के खिलौने को छिनकर उसका मजाक बना रहे थे। अब चाहे वरिष्‍ठ हो या साधारण आप क्रिकेट में क्‍या देख रहे है। इतना शानदार क्रिकेट विश्‍वकप चल रहा है। उसमें आपको चौक्‍के छक्‍के नही दिख रहे है। आपको इसमें ये सब कैसे दिख रहा है। एक क्रिकेट प्रेमी को मैदान पर क्रिकेट के अलावा कुछ नही दिखाई देता है। जो यह सब देखते है वो निश्चित रूप से क्रिकेट प्रेमी नही है। भारत पाक मैच में दर्शको दवारा वन्‍देमातरम भी गाया गया था। आपको वो दिखना चाहिए परन्‍तु जब क्रिकेट मैच मे मसाला नही मिला था इस प्रकार की चीजे दिखाई देने लग गयी।


वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर ने अपने लेख में पाकिस्‍तान के कोच का हवाला देते हुए लिखा है कि उनके कोच को हार का एक कारण भारतीय दर्शक लगे। उनका कहना था कि पाकिस्‍तानी दर्शको को वीजा नही देने से एक भी पाकिस्‍तानी दर्शक मैदान में नही था। वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर ने इस बात की वकालत की है कि बीसीसीआई और भारत को उदार दिल दिखाते हुए पाकिस्‍तानी दर्शको का भी वीजा दिया जाना चाहिए था। भारत पाक मैच के दौरान जब पाकिस्‍तानी बल्‍लेबाज रिजवान आउट होकर पवेलियन लौट रहे थे तो दर्शको ने जय श्रीराम के नारे लगाये। कई लोगो ने इसे मान लिया कि यह नारा दर्शको ने पाकिस्‍तानी बल्‍लेबाज को चिढाने के लिए बोला था। पत्रकार शेखर ने अपने लेख में यह भी लिखा है कि पाकिस्‍तानियो ने १९९९ की तरह अल्‍लाह हू अकबर के नारे नही लगाये। उनका यह भी मानना हे कि दर्शको को भी अब निष्‍पक्ष होना चाहिए। वो यह भी कहते है कि भारत के स्‍टेडियमो में माईक से दिल दिल पाकिस्‍तान का नारा लगने का सोचना भी एक सपने जैसा होगा। शेखर की तरह ही एक आस्ट्रेलियाई लेखक ने भारत पाक मैच के दौरान स्‍टेडियम में एक लाख से जयादा दर्शको के नीली जर्सी देखकर लिखा जैसे स्‍टेडियम में नीली जर्सी की बाढ आ गयी हो। उन्‍होने कहा स्‍टेडियम में मानो मैच नही कोई रैली हो रही हो। उन्‍होने इसकी तुलना नाजियो से भी की। ऐसे लेखको और पत्रकारो ने एक स्‍टेडियम में भारत पाक मैच के अलावा सबकुछ देख लिया। इन्‍होने मैदान में सिर्फ क्रिकेट नहीं देखा और इ्रन्‍हे सब कुछ दिखाई दे गया।

यहां एक टिवटर पोस्‍ट का जिक्र करना भी लाजिमी होगा। ए‍क सबक्राईबर की टिवटर पोस्‍ट में इस बात का समर्थन किया गया कि क्रिकेट को जातिवादी नजरिये से भी देखा जाना चाहिए। उन्‍होने इसे क्रिकेट की सामाजिक व्‍यवस्‍था का नाम दिया। आज तक किसी क्रिकेटर और समीक्षक ने क्रिकेट में जाति व्‍यवस्‍था की बात नही उठायी। यहां तक किसी क्रिकेटर और तबके ने भी क्रिकेट में जाति की समीक्षा नही की। लोग क्रिकेट को कहां ले जा रहे है। क्रिकेट में जाति कहां से आ गयी। क्रिकेट सिर्फ क्रिकेट है। उसकी आप जाति के आधार पर समीक्षा कैसे कर सकते हो। उनका कहना है कि वो इस प्रकार से क्रिकेट के सामाजिक प्रभाव का अध्‍ययन कर रहे है। क्रिकेट एक खेल है और खेल को खेल की नजर से देखा जाना चाहिए। इसमें कोई और चीज नही देखी जानी चाहिए।

भारत में विश्व कप चल रहा है और शानदार तरीके से चल रहा है परन्‍तु मसाला नहीं निकल रहा है। इसलिए लेखक और पत्रकार क्रिकेट से इस प्रकार मसाला निकाल रहे है। भारत पाक मैच में दोनो देशो के खिलाडियो के बीच सौहाद्रपूर्ण संबध रहे। पूर्व के मैचो की तरह दोनो देशो के खिलाडियो के बीच कुछ नहीं हुआ। इससे पहले के विश्‍वकपो के मैचो में भारत और पाक खिलाडियो के बीच छेडखानी और कहानी होती रही है। इस बार ऐसा कुछ नही हुआ तो पत्रकारो ने दर्शको मे से मसाला ढुंढ निकाला। कोई भी दर्शक अवांछनीय काम करता हे या नारा लगाता है तो उसके लिए कानून बने हुए है। यदि आप इस प्रकार से दर्शको और क्रिकेट को देखोगे तो फिर क्रिकेट क्रिकेट नही रह जायेगा। यह क्रिकेट है। इसमे आप मैच कैसे खेला गया , य‍ह देखिये। यह देखिये कि किसने रन बनाये और किसने नही बनाये। नही बनाये तो क्‍यो नही बनाये। उनका पूराना इतिहास क्‍या है। क्रिकेट में आप क्रिकेट देखिये। क्रिकेट में राजनैनिक चीजे देखने की अनावश्‍यक कोशिश नही करनी चाहिए। यह क्रिकेट है मेरी जान। इसका मजा लिजिए। इसमे आनंद के पल ढुंढये नफरत के लिए दूसरी बहुत सी जगहे है।

---------------


Wednesday, September 27, 2023

हांगझोऊ एशियन गेम्स

 


एशियन गेम्स 2023 चीन के हांगझोऊ शहर में शुरू हो चुके है। यह एशियन गेम्स 2022 में आयोजित होने थे परन्तु कोविड के कारण इनका आयोजन 2023 में हो रहा है। पहने दो दिनो में चीन 40 से ज्यादा स्वर्ण पदक जीतकर प्रथम स्थान पर बना हुआ है और ऐसा लगता है कि वो अंत तक प्रथम स्थान पर बना रहेगा। चीन वैसे भी एशिया में खेलो मे ंसबसे आगे है और इस बार मेजबान होने के कारण उसकी पदक संख्या में और वृद्धि होगी। भारत भी अपनी ठीक शुरूआत कर चुका है। दो दिनो में दो स्वर्ण जीतकर छठे स्थान पर बना हुआ है। इस बार भारत को युवा खिलाडियो से बहंत ज्यादा उम्मीदे है क्योंकि एशियाई खेलो का प्रदर्शन ही आने वाले ओलम्पिक खेलो की प्रेरणा बनेगा। भारत के लिए चुन्नौती इसलिए भी बडी है क्योंकि वह जकार्ता एशियाई खेलो में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुका हे। जकार्ता में भारत ने 16 स्वर्ण सहित कुल 70 पदक जीते जो भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन है। भारत के लिए इस आंकडे को पार करना सबसे बडी चुन्नौत्ती होगी। 


भारत में हाल ही के वर्षो मे ंखेलो के लिए उत्साहवर्द्धक माहौल बना है। भारत के युवाओ ने ऐसे खेलो में अकल्पनीय सफलताऐं हासिल की है जिससे युवाओ का रूझान खेलो की ओर हुआ है। भारत में एथलेटिक्स में नीरज चौपडा की सफलता ने देश में एक नया माहौल पैदा किया है जिससे युवाओ में यह विश्वास पेदा हुआ कि वे क्रिकेट के अलावा भी अन्य खेलो के द्वारा भी अपना नाम कमा सकते है। नीरज चौपडा ने युवाओ को एक नया जोश दिया कि वे एथलेटिक्स को भी कैरियर बना सकते है। पीवी संधु और मीरा बाई चानू की सफलताओ ने इसे परे जाकर नयी उम्मीदे जगायी है। महिला क्रिकेट में भारत ने नये आयाम छुऐ है। इससे देश में यह विश्वास पैदा हुआ है कि महिलाये भी खेलो में भारत के लिए बडी सफलताऐं प्राप्त कर सकती है। महिला क्रिकेट की सफलताओ ने यह दिखा दिया कि खेलो में देश को पदको के लिए केवल पुरूषो पर निर्भर रहना जरूरी नही है बल्कि महिलाऐं भी पदक दिलाकर देश का नाम रोशन कर सकती है। इसी सोच के साथ भारत हांगझोऊ गेम्स में भाग ले रहा है। भारत की महिलाओ ने क्रिकेट में पहला स्वर्ण पदक जीत कर इसकी शुरूआत कर दी है। भारत ने जकार्ता में 69 पदक जीते थे परन्तुं पदक तालिका में में 8वां स्थान प्राप्त किया था। भारत ने पदकतालिका में 1951 में दूसरा स्थान, 1962 में तीसरा, 1966 और 1970 में पांचवा स्थान प्राप्त किया था। यह भारत के पदकतालिका मे उच्च स्तर है। भारत वापिस अब तक इन प्रदर्शनो को दोहरा नही पाया हे। भारत के युवाओ की हाल की सफलताओ से हांगझोऊ में यह उम्मीद जगी है। भारत ने अच्छी शुरूआत करके इसका आगाज कर दिया है। 


भारत ने इस बार बहुत बडा दल हांगझोऊ के लिए भेजा है। इसमें एथलेटिक्स की संभावनाऐं ज्यादा हे। एथलेटिक्स का दल बहुत बडा है जिसमें नीरज चौपडा भी शामिल है। इसके साथ ही अविनाश साबले और ज्योति बाराजी से भी पदक की उम्मीदे है। यह माना जा रहा है कि इस बार एथलेटिक्स में भारत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है। भारत को जिन नये खेलो मे ंउम्मीदे है उनके क्रिकेट और तीरंदाजी है। क्रिकेट में एक स्वर्ण पदक जीत चुका है और पुरूष वर्ग में भी भारत को उम्मीद है तीरंदाजी में अदिति गोपीचंद स्वामी से भारत को बहुंत बडी उम्म्ीद हे। निकित जरीन में बौक्सिंग मे भी भारत के लिए आशाऐ जगायी है। बोक्सिंग में भारत को इस बार अधिक पदक की उम्मीद है जो जरीन और लवनीना के रहते पुरी हो सकेगी। भारतीय टीम इस बार पूरे जोश के साथ एशियन गेम्स में गयी है। टीम को बहुत बडी उम्मीदे खेल प्रेमियो को नही है परन्तु टीम इतनी प्रतिभाशाली है कि वो गेम्स में पदको की झडी लगा सकती है। भारत ने एथलेटिक्स में 68 सदस्यो का दली भेजा है। इस दल से ज्यादा उम्म्मीदे है और यही दल है जो सबसे ज्यादा सुर्खिया बटारेगा। 



भारत के लिए एशियाई खेल खास महत्व रखते है। भारत को इन खेलो में अच्छा प्रदर्शन करना ही चाहिए। एशियाई खेलो में पदक तालिका में उच्च स्थान प्राप्त करना देश की प्रगति के अवसरो को बताता है। खेलो की सफलता बताता है कि देश विकसित राष्ट्र की ओर कितना बढा है। पिछले कुछ सालो में देश के खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। इसका असर खेलो में देखा गया है। राष्ट्रमण्डल खेलो में भारत का प्रदर्शन इस बात का गवाह है। इससे युवाओ में आत्मविश्वास भी आता है और उन्हे लगता है कि वे देश के लिए कुछ कर सकते है।  एशियाई खेलो की सफलता ओलम्पिक के लिए मार्ग बनाती है। इसे ओलम्पिक की तैयारियों के रूप में भी लेना चाहिए। भारत को एशिया में महाशक्ति बनने के लिए खेलो में भी अपना जलवा दिखाना होगा। भारत के पदको की संख्या सौ नही तो लगभग सौ के आसपास तो होनी ही चाहिए। यह भारत क ेलिए अच्छी बात है कि हर एक खेल में युवा आगे आ रहा है। न केवल आगे आ रहा है बल्कि सफलताऐं भी हासिल कर रहा है। हाल ही के दिनो में ऐसी प्रतियोगिताओ में भारत ने सफलता हासिल की है जिनके बारे में कभी सोचा ही नही गया हो। नीरज चौपडा की सफलता इसी प्रकार की है। 


हांगझोऊ में भारत सफलता की नयी इबारत लिख सकता है। यह सबसे अच्छी बात है कि इस बार उम्मीदो का बोझ भारत पर नही है क्योकि एशियाड के साथ क्रिकेट का विश्वकप भी आयोजित होने जा रहा है। इस कारण भारतीय खिलाडी उन्मुक्त होकर प्रदर्शन कर सक्रेेगे। भारत को जकार्ता ओलिम्पिक से आगे निकलकर पदको की संख्या लगभग सौ पहंुचानी होगी। नीरज चौपडा की सफलता को भुनाते हुए और अधिक पदक जीतने होगे। भारतीय युवाओ की प्रतिभा देखते हुए यह संभव हे। हांगझोऊ में भारत की उम्म्ीदो की उडान कर तक उड पाती है यह देखना बाकि है। 

-----

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर 

9413769053


Wednesday, August 30, 2023

एशिया कप में भारत पाक मुकाबले पर निगाह



एशिया कप किकेट की बात होती है तो निश्चित रूप से हमारे दिमाग में भारत और पाकिस्‍तान आते है। पूरी दुनिया में क्रिकेट पर बादशाहत करने वाले ये दो देश एशिया में क्रिकेट के पर्याय माने जाते है परन्‍तु आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एशिया कप के फाईनल में एक बार भी भारत और पाकिस्‍तान का मुकाबला नही हुआ है जबकि अब तक इसके पन्‍द्रह संस्‍करण खेले जा चुके है। एशिया कप दुनिया के पूराने टुर्नामेंटो में से एक है और इसकी शुरूआत १९८४ में यूएई से हुई थी। यह भी सही है कि पूरी दुनिया में एशिया में क्रिकेट की भारत और पाकिस्‍तान के मुकाबले मशहूर है परन्‍तु एशिया कप में भारत पाक मुकाबले बहुत कम हुए और फाइ्र्नल में तो आपस में भिडे ही नही है। पाकिस्‍तान तो मात्र दो बार इसे हासिल कर पाया है। उन दिनो में भी पाकिस्‍तान इसे हासिल नहीं कर पाया था जब श्रीलंका कमजोर टीम मानी जाती थी और टुर्नामेंट तीन टीमो के बीच ही होता था। इस बार खेला जा रहा एशिया कप भारत और पाकिस्‍तान मुकाबले के कारण उत्‍सुकता का केन्‍द्र बना गया हे। इस बार फाईनल भारत और पाकिस्‍तान के बीच होने की संभावनाऐ भी व्‍यक्त की जा रही है। चार दशक बाद भी एशिया कप क्रिकेट दुनिया ए क्रिकेट में आकर्षण का केन्‍द्र बना हुआ है।

बदलते वक्‍त के साथ एशिया कप में प्रतिस्‍पर्धा बढ गयी है। १९८४ में शुरू हुई प्रतियोगिता में पहले केवल तीन देश ही भाग लेते थे। उनमें भी श्रीलंका दुनिया की सबसे कमजोर टीम होती थी। इसके बावजूद उस समय भी एशिया कप को देखने वालो की संख्‍या ज्‍यादा थी। उस समय भी इस प्रतियोगिता को भारत और पाकिस्‍तान के मुकाबले के लिए पसंद किया जाता था। यह टुर्नामेंट भारत और पाकिस्‍तान के खराब राजनैतिक संबधो की भेंट भी चढता रहा है। १९९०-९१ के टुर्नामेंट  में भारत और पाकिस्‍तान के खराब संबधो के चलते पाकिस्‍तान ने इस टुर्नामेंट में भाग नहीं लिया। १९९३ का टुर्नामेंट  भारत और पाकिस्‍तान के खराब संबधो के कारण रदद ही कर दिया गया। पिछले पांच वर्षो से भारत और पाकिस्‍तान के खराब संबधो के चलते टुर्नामेंट यूएई में आयोजित हुआ। इस बार के टुर्नामेंटपर भी इन संबधो का साया है। भारत और पाकिस्‍तान का लीग मैच भी श्रीलंका के कैण्‍डी में खेला जायेगा। टुर्नामेंट शुरू होने से पहले तक पाकिस्‍तान खेलने से इनकार कर रहा था परन्‍तु आईसीसी के नियामो के चलते वो खेलने को राजी हुआ । इसके बाद से इस मुकाबले को भारत-पाकिस्‍तान के महामुकाबले को लेकर माहौल बनाया जा रहा है। जब हम भारत – पाकिस्‍तान के महामुकाबले की बात करते है तो यह भूल जाते है कि वो एशिया कप के टुर्नामेंट में खेल रहे है जहां दूसरी और टीमे भी खेल रही है। यह भी उल्‍लेखनीय है कि इस टुर्नामेंट को भारत ७ बार श्रीलकां ६ बार और पाकिस्‍तान सिर्फ दो बार जीता है। भारत और पाकिस्‍तान के बीच एक बार भी फाईनल नहीं हुआ है परन्‍तु १७ लीग मैच हुए है जिसमें ९ में भारत जीता है और ६ में पाकिस्‍तान जीता है। पिछले वर्ष २०२२ में दोनो टीमो में एक एक मैच जीता है। इसके बावजूद एशिया कप क्रिकेट को भारत पाकिस्‍तान महामुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।

इस बार एशिया कप वनडे फॉर्मेट में खेला जायेगा। पिछले साल यह टी-20 के फॉर्मेट में खेला गया था। इस बार ग्रुप ए में भारत और पाकिस्‍तान के अलावा नेपाल भी शामिल है वहीं ग्रुप बी में श्रीलंका बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान है। ग्रुप बी अपेक्षाकत कठिन ग्रुप है। इसमें किसी भी टीम को कम नहीं आंका जा सकता है। वहीं ग्रुप ए आसान है। नेपाल नया क्‍वालिफायर है। नेपाल के लिए यह देखना महत्‍वपूर्ण होगा कि वो भारत और पाकिस्‍तान का मुकाबला किसी तरह से करता है। मुख्‍य मुकाबला भारत और पाकिस्‍तान के बीच ही रहेगा। इस बार भारत और पाकिस्‍तान के बीच फाईनल होने की प्रबल संभावना है। पाकिस्‍तान की टीम इस समय बेहद मजबूत स्थिति में है वहीं भारत की टीम भी बुमराह की वापसी के बाद संगठित आक्रमण के लिए तैयार है। भारत की शुरूआती बैटिंग लाइन किसी भी आक्रमण की बधिया उधेडने में सक्षम है। भारतीय टीम की सलामी जोडी यदि सफल होती है तो भारत के लिए मैच काफी आसान हो जायेगे। शुभग गिल अपनी लय कैसे बरकरार रख पाते है,उसी पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। गेंदबाजी में भारत के लिए बेहतर विकल्‍प उपलब्‍ध है। देखना यह है कि प्रबंधन इन विकल्‍पो का कैसे उपयोग कर पाते है। भारत के दिमाग में पाकिस्‍तान की टीम ही केन्‍द्र में रहेगी क्‍योंकि लीग मैचो में पाकिस्‍तान को हराना महत्‍वपूर्ण होगा ताकि ग्रुप टॉप कर सके। दूसरे दौर में भी उसे टॉप टु में रहने के लिए पाकिस्‍तान को हराना ही होगा। टुर्नामेंट का फॉमेंट इस प्रकार का है कि दर्शको को टुर्नामेंट में कम से कम दो बार भारत पाकिस्‍तान का मुकाबला देखने को मिले। यह मुकाबला उस समय और महत्‍वपूर्ण हो जाता है जब दोनो देशो के बीच द्विपक्षीय सीरीज २०१३ में बाद खेली नहीं गयी है।

इन सब के बावजूद एशिया कप को भारत और पाकिस्‍तान से ईतर बडे फलक पर देखा जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि क्‍वालिफाई टुर्नामेंट खेलकर नेपाल जैसी टीम मुख्‍य मुकाबला खेलने के लिए आयी है। अफगानिस्‍तान जैसी टीम किसी भी टीम को पटकनी दे सकती है। अब्‍दुल राशिद की गेंदबाजी टुर्नामेंट में चार चांद लगायेगी।बांग्‍लादेश एक बार भी प्रतियोगिता नहीं जीत पाया परन्‍तु बांग्‍लादेश टीम भी एक दावेदार है और वो टीम इतनी सक्षम है कि टुर्नामेंट जीत सकती है। हमे इन टीमो के मुकाबलो को भी देखना चाहिए। इन टीमो के मैचो में भी रोमांच चरम पर होता है। खासकर बाग्‍लादेशी क्रिकेट जो क्रिकेट को लेकर बहुत जुनूनी है। भारत और पाकिस्‍तान की असली परीक्षा इन टीमो के विरूद्धद मुकाबलो में होगी । इसलिए एशिया कप को भारत – पाकिस्‍तान के महामुकाबले के नजरयिे न देखकर इसे वहद स्‍तर पर 6 टीमो के मुकाबले के तौर पर देखा जाना चाहिए। इस बार टीमो के संयोजन को देखते हुए यह संभावना नजर आ रही है कि टीमो के बीच मुकाबला कांटे का रहेगा और बल्‍ले और बॉल का रोमांच चरम पर रहेगा।

----

 

Tuesday, August 15, 2023

दी हेयर एण्‍ड दी टॉरटाईज




 

मै दसवीं मे था तो मेरे मास्‍टरजी हमेंशा मुझे हेयर एण्‍ड टॉरटाईज की कहानी रटने को कहते थे। मास्‍टरजी का कहना था कि अंग्रेजी में यह कहानी याद कर ली तो पन्‍द्रह नंबर तो पक्‍के हो जायेंगे। हम लोगो उन दिनो हिन्‍दी मीडियम स्‍कूलो में पढते थे। पढाने वाले भी हिन्‍दी मीडियम के ही होते थे। कहने का मतलब उनकी भी अंग्रेजी कोई ज्‍यादा स्‍ट्रांग नहीं हुआ करती थी। हम बच्‍चो को रटा रटा करके तैंतीस नंबर लायक तैयारी करवा देते थे। मैने हैयर एण्‍ड टारटाईज कहानी का मतलब समझा तब से मै इसे झूठ मानता था। मेरा मानना था कि कछुआ कभी भी खरगोश से जीत नहीं सकता है। मेरा नाना हमेंशा कहते कि जीवन का अनुभव आयेगा तो समझ आयेगा। नाना घर के अहाते मे बैठे धनजी से बाते करते रहते । धन जी लकडी पर रन्‍दा चलाते हुए किस्‍से बताते रहते । दरअसल अहाता धन जी को किराये पर दे रखा था वहां लकडी का काम करते थे। नजदीक ही उनके लडके की लटठ बेचने की दुकान थी। उसकी दुकान में बहुत सारे लटठ पडे रहते। रस्‍सीयां और फावडे भी उनकी दुकान में थे। उनकी दुकान पर गांव वाले ही आते थे। गरमियों की छुटिटयों में सुबह मै तैयार होकर छत्‍त पर खड होता तो मेरे माथे पर पसीने की बूंदे चमकने लगती थी। मेरी नानी मेरे चेहरे पर तेल लगाती थी। इसलिए पसीने की बूंद माथे पर चमकती थी। मै छत्‍त पर खडा नीचे सडक पर देखता था। सुबह फटफटियों की आवाज कानो में गूंजती थी। ग्‍यारह बजे तक सभी दुकाने खुल जाती थी। दूर से श्‍यामजी को साईकिल पर आते मै देख लेता था। श्‍यामजी साईकिल पर आगे अपने बेटे को बैठाकर लाते थे। धूप से आंखो को अंदर धंसाते हुए वो साइकिल के हैडिल को कसकर पकडे रखता । श्‍यामजी को दुकान खोलने में आधा घंटा लगता था। दुकान खोलने के बाद सामान लगाने में उन्‍हे समय लगता था। वो अपने बेटे बाबू को सामने गददी पर बैठा देते थे। बाबू दिनभर गददी पर बैठा रहता। दरअसल बाबू मंदबुद्धि था और गूंगा था। मै दुकान खुलने के थोडी देर बाद दुकान पर चला जाता । बाबू से खेलता रहता। बाबू कुछ बोलता नही था। पर वो समझता था। बाबूलाल जी दुकान के अंदर बैठे उपन्‍यास पढते रहते । उन्‍हे वेदप्रकाश के उपन्‍यास पसंद थे। वे वर्दी वाला गुण्‍डा, सलाखो का बदला, बिना मांग सिंदूर जैसे उपन्‍यास पढते थे। मै कभी समझ नहीं पाया कि बिना चित्रो की किताब पढने में उन्‍हे क्‍या मजा आता है।

धन जी श्‍याम जी के पिता थे। धन जी हमारे अहाते में लकडी का काम करते । तैयार काम दुकान भिजवा देते । श्‍यामजी कई बार अहाते में आते और बाउजी को बताते कि क्‍या सामान तैयार करना है और ग्राहक कैसा सामान चाहते है। धन जी लकडियो पर रन्‍दा फेरते हो और फिर एक आंख बंद करके उस लकडी को जांचते। नानी चाय लाती तो धनजी लकडी को एक आंख से जांचते हुए बोलते मांजी सा भूखे पेट चाय भी नहीं निगली जाती। चाय भी कुछ पेट में हो तो अच्‍छी लगती है। नानी भी धन जी को कहती – खाली पेट है। इसलिए कहती हूं पी लो। आधार रहेगा। इतना कहने के बाद धनजी चाय पीने बैठ जाते। धन जी चाय पीते हुए अपने दुकान पर बैठे अपने पोते को देखते रहते । पोते के चेहरे पर धूप आती तो वो ऐं ---- ऐं------ ऐं --- करता तो श्‍यामजी उसके उठाकर छाया में बिठा देते । धन जी कभी अपने पोते के बारे में बात नहीं करते । ना ही श्‍याम जी कभी अपने बेटे के बारे में बात करते । श्‍याम जी दिन भी दुकान में काम करते तो बाबू चुपचाव उसे देखता रहता। शाम को मै कभी गली में फुटबाल से खेलता तो वो मुझे देखकर खुश होता। धन जी ने एक बार नाना जी से कहा था कि डाक्‍टर को दिखाया था । डाक्‍टर ने कहा एक आपरेशन के बाद यह बोलने लगेगा। तीन लाख का खर्व आयेगा। श्‍यामू मेहनत कर रहा है। पैसे इकक्टठे होते ही इसका इलाज करायेंगे। श्‍यामू ने पैस काफी इकटठे कर लिये है। जल्‍दी ही इलाज करायेगा। ये बोलने लगेगा। श्‍याम जी कम बात करते थे। त्रिशूल फिल्‍म के अमिताभ की तरह मुस्‍कुराहट उनके चेहरे के आस पास भी नहीं फटकती थी। धनजी की नजर अपने बेटै की दकान पर बराबर बनी रहती थी। उनका व्‍यवहार एक खामोशी का था। खामोशी श्‍याम जी की दुकान में तैरती रहती थी। अपने बेटे के साथ उन्‍होने भी खामोशी को ओढ लिया था।

एक दोपहर मै श्‍यामजी की दुकान पर बैठा था। एक युवा अमिताभ जैसे जूते पहने हुए और काला चश्‍मा लगाये हुए आया। उसने बाबू के गाल छेडे और श्‍याम जी को एक पर्ची दी । श्‍याम जी ने उसे पैसे दे दिये। उसने मेरी तरफ देखा और बोला – मुकरी । मुकरी दरअसल एक फिल्‍मी कलाकार का नाम था। उसने बताया कि वो बाबू का चाचा है। बाहर पढकर आया है। अमिताभ का बडा फैन था। बाते भी अमिताभ की तरह ही करता था। लंबाई भी उसकी थी। आज पहली बार आया था परन्‍तु अब वो रोज आने लगा। कभी धनजी के पास चला जाता । कभी मेरी नानी से बाते करता। वो कहता मां सा मुंबई पैसेा की फैक्‍ट्री है। वहां पैसा डालो दुगुना पैसा निकलता है। हर्षद मेहता को देखो करोडो कमा लिये। मेरे पास पैसे हो तो मै सबके वारे न्‍यारे कर दूं। नानी उसे कहती कि मेहनत का कमाया हुआ पैसा बरकत करता है। पर वो अपने उलटे सीधे तर्क देता। फिर चाय पीकर चला जाता। फिर हमारे लिये रह जाती वही श्‍याम जी की दुकान जिसमें वो उपन्‍यास पढते रहते। बाबू बाहर दौड रहे फटफटयिो को देखता रहता। कभी दिक्‍कत होती तो ऐं -----ऐं-------ऐं-----------करता तो श्‍याम जी उसे ठीक कर देते।उसका चाचा भगवान आता तो पैसा की बाते करता या फिर फिल्‍मो की। कभी बताता कि धीरूभाई कैसे धनवान बना। बडे बडे सपने दिखाता। मै तो उसकी बाते सुनकर विस्मित रह जाता । कभी कभी धन जी भगवान को डांट लगा देते परन्‍तु भगवान की बाते साईकिल की तरह दौडती रहती। हम लोग भगवान कही बाते बडे चाव से सुनते। मुझे लगता था कि ये एक दिन बहुत पैसे वाला आदमी बनेगा। कभी कोई पेन लाकर दिखाता कि यह मेड इन जापान है। कभी कैमरा लाता और कहता कि यह मेड इन रसिया है। हम इन चीजो को देखकर दांतो तले अंगुली दबा लेते।

श्‍याम जी ने कहा था कि दो दिन या तो भगवान बैठ जायेगा दुकान में या फिर बंद रखनी पडेगी। बाबू का ओपरेशन कराना है। सब बाते तय हो गयी है। दो दिन बाद आपरेशन था। अगले दिन सुबह दुकान बंद थी। कोई नहीं आया था। नाना ने कहा ओपरेशन तो दो दिन बाद था आज दुकान बंद कैसे है। उन दिनो फोन भी नहीं थे। नाना ने कुछ देर इंतजार किया। फिर अखबार पढने लग गये। मै बैचेन हो गया । क्‍या हो गया । वे आये क्‍यों नहीं। पास की दुकान के अग्रवाला साहब आ गये थे। मैने उनसे श्‍याम जी के बारे मे पूछा तो उन्‍होने बताया कि कल रात उनका भाई भगवान घर से तीन लाख रूपये लेकर भाग गया। नाना खबर सुनकर बाहर आये और बोले थाने में रपट लिखवाई है क्‍या। अग्रवाल साहब नहीं नहीं में सिर हिलाया। नाना अंदर आ गये। हाथ टुठी पर रखकर बैठ गये। तीन बजे के करीब श्‍याम जी साईकिल पर बाबू को बिठाकर आये। दुकान खोलकर जंचाई और सामान बेचना शुरू कर दिया। अग्रवाल साहब श्‍याम जी से पूछने गये कि भगवान कैसे पैसे लेकर भाग गया तो श्‍याम जी ने कहा – आपसे किसने कहा। वो भाग कर नहीं गया है। वो पढने गया है। सुनकर अग्रवाल साहब अपनी दुकान पर चले गये। श्‍याम जी ग्राहक को सामान देने के बाद वापिस एक उपन्‍यास जिस पर बंद दरवाजे लिखा था पढने बैठ गये। बाबू बाहर फटफटिये की आवाजे सुनकर ऐ ऐ कर रहा था।