Wednesday, June 19, 2024

बाहर से लायी गयी पिच.. खरी नहीं

 

टी 20 विश्‍वकप अमेरीका और वेस्‍टइंडीज में संयुक्‍त रूप से हो रहा है। टी 20 विश्‍कप में अमेरिका को इसलिए जोडा गया ताकि क्रिकेट का दायरा बढाया जा सके। जब खेल मे दुनिया का सबसे ताकतवर देश भी जुडेगा तो खेल की ताकत बढेगी। इस लिहाज से टी 20 का प्‍लेटफार्म सबसे उपयुक्‍त है। टी 20 क्रिकेट में चौको छक्‍को की बौछार देखकर लोग सहज ही इस खेल की ओर आकर्षित होंगे, यह मंशा आईसीसी की रही होगी। इस कारण विश्‍व कप में १६ मैच अमेंरीका में रखे गये परन्‍तु शुरूआती कुछ मैचो के बाद ही पिच को लेकर विवाद हो गया। ड्राप इन पिचो के कारण मैचो में कोई भी टीम १४० का स्‍कोर भी पार नही कर पायी। पाकिस्‍तान, न्‍यूजीलैण्‍ड ओर श्रीलंका जैसी टीमे पहले ही दौर में बाहर हो गयी। ड्राप इन पिचो को लेकर पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। शुरूआती दौर के बाद कुछ मैचो को दूसरी जगह स्‍थानान्‍तरित करने की भी चर्चा चली थी और खबरो के अनुसार बकायादा आईसीसी ने इस पर विचार भी कियाा बाद में इससे इनकार किया। 

टी 20 को चौको छक्‍को की क्रिकेट कहा जाता है और लोग इसे देखने के लिए मैदान में आते भी इसीलिए है परन्‍तु इस विश्‍वकप में अमेरीका में खेले गये मैच निम्‍न स्‍कोर वाले रहे और बल्‍लेबाजो की बजाय गेंदबाज हावी रहे । पहले दो चार मैचो के बाद भारत पाक मैच दूसरी जगह शिफट करने की चर्चाऐं होने लगी। भारत ने पाक के विरूद्ध निर्धारित ओवरो में ११९ रन बनाये और टी 20 के लिहाज से यह जीतने लायक स्‍कोर नही था। पाक ने अपनी पारी शुरू की तब यह लग रहा था कि यह एक आसान मैच है परन्‍तु ९०रन तक आते आते पाकिस्‍तान के हाथ पांव फूलने लगे और मैच धीरे धीरे भारत के पक्ष में आने लगा। भारत ने यह मैच ६ रनो से जीत लिया। पाकिस्‍तान अमेंरिका के विरूद्ध भी एक निम्‍न स्‍कोर वाला मैच हार गयी। इस तरह से विश्‍वकप खिताब  की प्रबल दावेदार टीम टुर्नामेंट  से बाहर हो गयी। यह कहीं न कहीं आयोजको की असफलता है क्‍योंकि केवल पाकिस्‍तान ही बाहर नही हुई बल्कि श्रीलंका और न्‍यूजीलैण्‍ड में भी बाहर हो गये। इन उलटफेरो का कारण ड्राप  इन पिचो को बताया जा रहा हे। खबरो के अनुसार इस विश्‍कप के लिए १० ड्राप इन पिचे एडिलेड से लायी गयी थी जिसे तैयार कर न्‍यूयॉक के नसाऊ स्‍टेडियम में बिछायी गयी जो गेंदबाजो के लिए स्‍वर्ग और बल्‍लेबाज के लिए कब्रगाह साबित हुई। 

ड्राप इन पिचे मुख्‍यत उन मैदानो पर बिछायी जाती है जो मैदान मुख्‍य रूप से क्रिकेट के लिए नही बने होते है। ऐसी पिचो का प्रयोग मुख्‍य रूप से आस्‍ट्रेलिया में होता है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउण्‍ड में २४ मीटर लंबाई और ३ मीटर चौडाई वाली पिच तैयार की जाती है। काली मिटी की परत के बाद ऊपर घास उगाई जाती है और यह सारी प्रक्रिया स्‍टील के फ्रेम में की जाती है। जब क्रिकेट मैच होता है तो ३० टनी वजनी इन पिचो को कस्‍टमाइड ट्रेलर से उठाकर २७ मीटर गहरे सीमेंट के स्‍लैब के ऊपर डाल दिया जाता है। चूंकि ये पिच स्‍टील के फ्रेम के भीतर बनती है ऐसे में यह सख्‍त होती है, परंपरागत पिचो की तरह यह टूटती नही हैा इस पर घास कम या ज्‍यादा रखी जा सकती है। मैच खत्‍म होने के बाद इन पिचो को वापिस हटा लिया जाता है और यहां पर क्रत्रिम घास लगाकर वापिस मैदान अन्‍य खेल के लिए तैयार हो जाता है। विश्‍कप में ड्राप इन पिचे बल्‍लेबाजो के लिए भयावह बन गयी। 

इसको लेकर पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। पूर्व क्रिकेटर और कोमेण्‍टेटर इरफान पठान ने इन पिचो को असुरक्षित बताया। आस्‍ट्रेलियाई क्रिकेटर माईकल वान ने कहा है कि अमेरीका में क्रिकेट का प्रचार प्रसार अच्‍छी बात है परन्‍तु इस प्रकार की पिचो पर खिलाडियो को खेलना अच्‍छी बात नही है। जिम्‍बाब्‍वे के पूर्व क्रिकेटर एंडी फलावर ने कहा है कि अंतर्राष्‍ट्रीय मैचो के लिए इस प्रकार की पिच ठीक नही है। कोमेण्‍टेटर सुशील दोषी ने अपने एक लेख में कहा कि भारत में ऐसी पिचे होती तो पूरी दुनिया इसे बहुत तूल देती है और भारत की चारो तरफ से आलोचना की जाती है परन्‍तु अमेरीका में होने के कारण सभी लोग इसका बचाव कर रहे है। 

अमेरीका में क्रिकेट का प्रचार प्रसार होना ही चाहिए परन्‍तु ऐसी पिचे क्रिकेट के लिए भी खतरा है। इन पिचो के कारण विश्‍वकप का मजा किरकिरा हो गया। क्रिकेट की असली जंग देखने को नही मिली। टी 20 क्रिकेट का असली रूप देखने को नहीं मिला। ड्राप इन पिचे इतने बडे टुर्नामेंट के लिए उपयुक्‍त नही हो सकती है। संजय मांजरेंकर ने सही कहा है कि पिचे तो पहले भी खराब होती रही है परन्‍तु इस बार लगता है आईसीसी की तैयारी में कहीं कोई कमी है। फिलहाल विश्‍वकप का पहला दौर समाप्‍त हो चुका है और अब सभी मैच में वेस्‍टइंडीज में होगे और वहां उम्‍मीद की जानी चाहिए कि पिच का बवाल नही होगा। क्रिकेट प्रेमियो को पसंदीदा टी 20 क्रिकेट देखने को मिलेगी। 

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सीतराम गेट के सामने, बीकानेर ९४१३७६९०५३

Wednesday, May 22, 2024

टी 20 विश्‍वकप में भी बड़े स्‍कोर बनेंगे?




अगले सप्‍ताह अमेरीका और वेस्‍टइंडीज में संयुक्‍त रूप से टी 20 विश्‍व कप शुरू हो रहा है। यह विश्‍वकप भारत में आईपीएल समाप्‍त होने के तुरंत बाद शुरू होगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्‍या टी 20 विश्‍वकप में भी आईपीएल की तरह बड़े स्‍कोर बनेंगे। आईपीएल में जिस तरह से इस बार बड़े स्‍कोर बने उससे यह लगने लगा कि टी 20 क्रिकेट में कुछ भी असंभव नही है। इसीसे लोगो ने उम्‍मीदे लगा ली कि विश्‍वकप में भी इसी प्रकार से धमाकेदार बल्‍लेबाजी देखने को मिलेगी। लोगो की उम्‍मीदो को देखते हुए यह सवाल तैरने लगे है कि क्‍या विश्‍वकप में भी चौको और छक्‍को की बौछार देखने को मिलेगी? 


आईपीएल में इस बार बल्‍ले का जादू सिर चढकर बोला। दुनिया की सबसे बडी क्रिकेट लीग में इस बार आठ बार से ज्‍यादा २५० का स्‍कोर बना। सनराईजर्स हैदराबाद ने तो मुंबई के खिलाफ लीग मैच में ३ विकेट पर अब तक का सबसे बडा स्‍कोर २८७ बना डाला। एक समय ऐसा लगने लगा कि वे ३०० का आंकडा भी पार कर जायेंगे। अं‍तिम ओवर में ३० रनो का स्‍कोर भी बल्‍लेबाज पार करने लगे। आईपीएल २०२४ में बल्‍लेबाजो ने जिस प्रकार से रन बनाये उन्‍हे महामानव ही कहा जायेगा। दुनिया की सिरमौर लीग में जब तुफानी रफतार से रन बनने लगे तो क्रिकेट प्रेमी यह उम्‍मीद करने लगे कि टी 20 विश्‍वकप में भी यह रफतार जारी रहेगी। जब टी 20 विश्‍वकप में रनो की रफतार की बात आती है तो इस सवाल का जवाब हलक तक आकर रूक जाता है। जवाब जबान के पीछे छिप जाता है। यह इसलिए कि विश्‍वकप में टीम का स्‍कोर बहुत कम रहा है। विश्‍वकप २०२२ में केवल दो बार ही स्‍कोर २०० से पार गया है। २१० का स्‍कोर तो बना ही नही। इस विश्‍वकप में विनिंग टोटल १५० से १७० रहा है जबकि आईपीएल में विनिंग टोटल २५० प्‍लस रहा है। तो क्‍या विश्‍वकप मे भी इस बार स्‍कोर २०० से पार होना आसान हो जायेगा। इस संबधं में शिखर धवन कहते है कि टी२० विश्‍वकप में बडे स्‍कोर नही बन पायेगे। उन्‍होने इसका कारण टी 20 विश्‍वकप में ईम्‍पेक्‍ट  प्‍लेयर का नियम नही होना है। उनके अनुसार आईपीएल में बडे स्‍कोर का कारण ईम्‍पेक्‍ट प्‍लेयर का नियम होना है जिस कारण टास हारने के बाद भी टीम रणनीतिक तौर पर अपना खिलाडी बदल लेती थी। ईम्‍पेक्‍ट प्‍लयेर नियम के कारण टीम बारह खिलाडियो से खेलती थी। यही कारण रहा कि आईपीएल में बडे स्‍कोर बने। दक्षिण अफ्रीका के डेविड मिलर का कहना है कि‍ आईपीएल में बडे स्‍कोर बनने का कारण ईम्‍पेक्‍ट प्‍लेयर तो है ही साथ में परिस्थितियां बल्‍लेबाजो के अनुकूल होना है। पिच बल्‍लेबाजो के अनुकूल होने से बल्‍लेबाजी आसान हो जाती है। टी 20 विश्‍वकप में बडे स्‍कोर नही बनेगे क्‍योंकि वहां परिस्थितियां बल्‍लेबाजो के अनुकूल नही होगे। वहां पिच धीम होने की उम्‍मीद है। ऐसे में आईपीएल की तरह वहां छक्‍के लगना मुश्किल है। मिशेल स्‍टार्च भी इस बात से सहमत है कि टी 20 विश्‍वकप में आईपीएल की तरह बडे स्‍कोर नहीं बनेंगे। 


यह सही है कि आईपीएल में परिस्‍थ‍ितियां बल्‍लेबाजो के अनुकूल होती है। इसके अलावा सभी श्रेणियो के खिलाडी यहां खेलते है जबकि विश्‍वकप में दुनिया का श्रेष्‍ठतम खिलाडी खेलते है और श्रेष्‍ठ खिलाडी समूह में एक साथ खेलते है। आईपीएल में सभी खिलाडी नही खेलते है जबकि विश्‍वकप में  दुनिया के सभी खिलाडी भाग लेते है। ऐसे में टीम बडे स्‍कोर बना नही पाती है। जहां तक पिचो की बात है तो हर बार पिच धीमे नही होते है फिर भी विश्‍वकप में अंगुलियो पर गिनने लायक संख्‍या में टीमो ने २०० का स्‍कोर पार किया है। फिर भी विश्‍वकप में आईपीएल का प्रभाव तो आये बिना नही रहेगा। इस बार औसत स्‍कोर बढने की संभावना है। ऐसी आशा की जानी चाहिए कि इस बार स्‍कोर १८० से २०० के बीच सामान्‍य होगा। जहां तक ईम्‍पेक्‍ट प्‍लेयर का सवाल है, उसका फर्क पडता है परन्‍तु इतना बडा फर्क नही पडता कि स्‍कोर ५० रन ज्‍यादा हो जाये। फिर भी इस बार विश्‍वकप में टीमो का स्‍कोर थोडा बडा रहने वाला है। 


आईपीएल की आलोचना भी काफी होती है परन्‍तु इसका सकारात्‍मक प्रभाव भी है। आईपीएल के प्रभाव से टेस्‍ट मैचो में भी परिणाम आने लगे है और टेस्‍ट मैच तीन से चार दिन में समाप्‍त हो रहे है। उसी प्रकार से विश्‍वकप में भी अब स्‍कोर पहले के मुकाबले बडे होगे क्‍योंकि इस लीग से बल्‍लेबाजी की तकनीक में न केवल सुधार हुआ है  बल्कि नयी तकनीक भी सामने आयी है। विश्‍वकप में आईपीएल जितने बडे स्‍कोर भले ही ना बनो परन्‍तु रनो की संख्‍या पहले से बडी होगी। 


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सीताराम गेट के सामने, बीकानेर

Wednesday, April 24, 2024

टेनिस में सन्‍यास की उम्र का सवाल



दो बार की ग्राण्‍ड स्‍लेम चैम्पियन और पूर्व नंबर एक टेनिस खिलाडी गारबाइन मुगुरूजा ने ३० साल की उम्र में सन्‍यास ले लिया है। उसने २०१६ के फ्रेच ओापन फाईनल में सेरेना विलियम्‍स और २०१७ के विम्‍बलडन फाईनल में वीनस विलिम्‍यस को पराजित किया और इस प्रकार दोनो विलिम्‍स बहिनो को हराने वाली एकमात्र खिलाडी बन गयी। मुगुरूजा ने अपना रैकिट खूंटी पर टांगने की घोषणा करते हुए कहा कि वो अब एक नया अध्‍याय शुरू करेगी। मुगुरूजा के सन्‍यास के साथ ही एक बार फिर यह बहस छिड गयी है कि टेनिस में सन्‍यास की उम्र क्‍या होनी चाहिए। टेनिस की सन्‍यास की उम्र तय नही है परन्‍तु आमतौर जो टेनिस विज्ञ बताते है उस उम्र को तो टेनिस खिलाडी कई बार धत्‍ता बता चुके है। मुगुरूजा के ३० साल की उम्र में सन्‍यास के बाद एक बार फिर टेनिस में सन्‍यास की उम्र पर सवाल खडे होने शुरू हो गये है। 
मु्गुरूजा ने हालांकि अपने कैरियर में दो ही ग्राण्‍ड स्‍लेम जीते परन्‍तु उसका रिकार्ड शानदार रहा है। उसने कुल १० डबल्‍यूटीए खिताब जीते और डबल्‍यूटीए में नंबर एक भी रही है। वह ग्राण्‍ड स्‍लेम जीतने वाली प्रथम स्‍पेनिश महिला रही है। व‍ह जनवरी २०२३ के बाद से टेनिस से दूर थी। उसने उस समय कहा था कि वो टेनिस में खेलने का अंतराल बढा रही है जिससे के वो अपने परिवार और दोस्‍तो के साथ समय बीता सके। उसने सन्‍यास लेते वक्‍त भी कहा कि वो एक नया अध्‍याय शुरू करेगी। इससे सवाल उठता है कि मु्गुरूजा द्वारा ३० वर्ष की उम्र में लिया गया सन्‍यास सही वक्‍त पर है। टेनिस की एक बडी संस्‍था अपने विश्‍लेषण के आधार पर टेनिस में रिटायरमेंट की उम्र २७.५ वर्ष मानती है। संस्‍था ने रिटायरमेंट की उम्र फिटनेस और क्षमता के आधार पर बतायी है। यह आकलन कोर्ट पर सही भी साबित होता है। उस लिहाज से मुगुरूजा के सन्‍यास का निर्णय सही प्रतीत होता है परन्‍तु कुछ समय पहले एशली बार्टी ने २५ साल की उम्र में सन्‍यास ले लिया था। ऐसा माना जाता है कि टेनिस में कोर्ट पर खेलने के लिए जिन क्षमताओ की जरूरत होती है वो २५ साल की उम्र के बाद कम होने लगती है और इस कारण से प्रतियो‍गी टेनिस छोडने की उम्र २८ वर्ष के करीब मानी जाती है। टेनिस में कमोबेश सन्‍यास लेने वालो की उम्र २८ से ३० साल होती है। उसके बाद १७ से २० की उम्र के नये खिलाडी आ जाते है जिनकी चुन्‍नौती का सामना करना कठिन होता है। 
यह विश्‍लेषण उस समय झूठा साबित होने लगता है जब रोजर फेडरर ४१ साल की उम्र तक खेलते है। जोकोविच और राफेल नडाल ३७ साल की उम्र में भी कडी चुन्‍नौती युवाओ केा पेश कर रहे है। सेरनेा विलियम्‍स ४० साल की उम्र में भी वो ही फूर्ती दिखाती है। इससे पहले मार्टिना नवरातिलोवा ५०साल उम्र तक  और जॉन मेकनरो ४६ साल की उम्र  तक खेलेते रहे है। इवान लैण्‍डल, पैट केश, आन्‍द्रे अगासी ३५ साल की उम्र के बाद भी खेलते रहे है। जब इन खिलाडियो की रिटायरमेंट उम्र देखते है तो टेनिस की मानक रिटायरमेंट उम्र बेमानी लगती है। दरअसल हर एक टेनिस खिलाडी जब तक अपनी आय और क्षमता को सुरक्षित मानता है तब तक कोर्ट में डटा रहता है। उक्‍त सभी खिलाडी उम्र बढने के साथ भी युवा चुन्‍नौती के सामने टिके रहे है। एकल नहीं तो युगल के साथ कोर्ट में टिके रहे। रोजर फेडरर तो एकल में भी चुन्‍नौती के साथ खडे रहे । उनके लिए कोर्ट में जीतना सामान्‍य बात हो गयी थी। 
जो खिलाडी २५ से ३० साल की उम्र में सन्‍यास लेते है। उनके पास दूसरा कैरियर शुरू करने का विकल्‍प भी होता है जबकि ४० साल की उम्र में रिटायर होने के पास ऐसी संभावना कम होती है। रिटायरमेंट का सीधा संबध आय और भविष्‍य की सुरक्षा से है। जब तक खिलाडी को लगता है कि टेनिस में उसका भविष्‍य और आय सुरक्षित है,वह‍ खेलता रहता है। इस समय युवा खिलाडी भी अपना स्‍थान बनाने में नाकाम रहे है। हाल ही के वर्षो में ऐसा युवा नहीं आया है जो एक ग्राण्‍ड स्‍लेम जीतने के बाद अपनी रैकिंग में स्थिरता लाये । यदि ऐसा होता है तो पूराने खिलाडियो स्‍वत ही कोर्ट से हटना पडता है। इसलिए टेनिस में रिटायरमेंट की मानक उम्र बेमानी हो गयी है। अब बहुत कम ऐसे खिलाडी है जो ३०साल की उम्र तक सन्‍यास लेते है। अब ३० साल की उम्र के बाद तक खिलाडी खेलते रहते है परन्‍तु जिन खिलाडियो की रेकिंग गिरने लगती है वो जरूर २८ से ३० की उम्र में सन्‍यास ले लेते है। शीर्ष रैंकिंग के चलते बहुत कम खिलाडी कोर्ट छोडते है। मुगुरूजा की रैकिंग नहीं खेलने के कारण कम थी। मुगरूजा ने अपने कैरियर के उंचाईयो पर सन्‍यास लिया है। अब एशली बार्टी और मुगुरूजा जैसे उदाहरण कम है। 
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Sunday, March 24, 2024

गोऽली मारो भेजे को.........।

 


गोली मारो भेजे को,

भेजा शोर करता है! 

अरे !नहीं नहीं ! गोली मत मारिये भेजे को । भेजे को बीेकानेर ले आईये। होली की मस्ती में भेजे का सारा शोर फुर्रर्र हो जायेगा। इन दिनो बीकानेर के परकोटे के चौको मे युवाओ की जो भीड दिखती है यह भीड नही युवाओ का ज्वार है। इस उठते हुए ज्वार में सारे तनाव और शोर बहते नजर आते है। बिस्सो के चैक में रम्मत से पहले जब माताजी प्रकट होते है तो युवाओ में भक्ति का अदभूत ज्वार देखने को मिलता है। भेजे का सारा तनाव का शोर मस्ती के शोर में बदल जाता है। फिजांओ में तनाव धुंऐ की तरह उडता नजर आता है। वे अपना ही नही दूसरे का तनाव भी फुर्रर कर देते है। 





इस हफ्ते बीकानेर में जहां एक ओर होली की मस्ती थी तो दूसरी ओर बीकानेर थियेटर फेस्टिवल शुरू हुआ । ऐसा लग रहा था कि बीकानेर के बारहगुवाड चौक से शुरू हुई नाटयकला टी.डी आटोडोरियम के मंच तक पहुंच गयी। कला के पारखी लोगो को हुजूम दोनो जगह उमड़ पडा। मै रंगमंच का शौख रखता हूं और बीकानेर थियेटर फेस्टिवल का तो इंतजार रहता ही है। इस बार फेस्टिवल के नाटक रविंद्र रंगमंच पर नही होने से मै देख नहीं पाया। शहर से दूर गंगाशहर में टी डी आटोडोरियम में शाम के नाटक खेले गये । मै दूसरे दिन मुंबई नाटक मंडली की प्रस्तुती देखने गया। ये हिंजड़ो के जीवन और संघर्ष पर आधारित नाटक था। कलाकारो का बेहतरीन अभिनय था। नाटक लंबा होने से दर्शको को बोरियत होने लगी। फिर भी कलाकारो ने अपनी अदाकारी से दर्षको का ध्यान खींचा। बाकि दिनो में मैने बहुत कोशिश की परन्तु समय नहीं निकाल पाया। 


उधर बीकानेर थियेटर फेस्टिवल शुरू हुआ ईधर शहर में होली की मस्ती शुरू हो गयी। पहले दिन नत्थुसरगेट पर फक्कडदाता की रम्मत खेली गयी। रम्मत एक लोक कला तो है ही साथ में यह अच्छी बात है कि दर्शक, कलाकार और वीआईपी सब एक समान माने जाते है। कोई भी मंच तक जा सकता है। कोई भी कलाकारो का साथ गायन में दे सकता है। भीड का रैला का रैला चल रहा था। 



दूसरे दिन बिस्सो के चौक में रम्मत थी। रम्मत से पहले माताजी के प्रकट होने के दृश्य को देखने के लिए हजारो लोग आते है। घरो की छत्ते और चौक का हर कोनो भीडसे ठसाठस भर जाता है। मै अपने दोस्त उमेश के संग गया था। भीड से एक धक्का आता है और हम सीधे मंच तक पहुंच जाते है और एक धक्के के साथ ही वापिस पीछे पहुंच जाते है। भीड मे हमे कई कलाकार दिखाई दिये जो अलग अलग प्रकार के रूप धरे हुए थे। माताजी के प्रकट होने पर भीड पूरी तरह से भक्तिभाव से माताजी को समर्पित हो जाती है। माताजी का आर्षीवाद लेने के लिए होडा होडी मच जाती है। हमने भी माताजी के दर्शन किए और  भीड से निकल कर घर को आये। 



होली के चौथे दिन आचार्या के चौक में अमर सिंह राठौड की रम्मत थी। इस रम्मत से पहले भी हम पहुंच गये। रम्मत के कार्यक्रम रात को 12 बजे बाद शुरू होते है। हम मोहता चौक् पहुंचे वहां डांडिया का कार्यक्रम चल रहा था। बाईक हमारी पहले ही रोक ली थी। डांडिया की कुछ देर मस्ती ली। फिर हमारे कदम आचार्यो के चैक् की ओर चल दिये। जहा माता भवानी के प्रकट होने की तैयारी चल रही थी। ष्यहां धक्का मुक्की बिस्सौ के चौक् से ज्यादा थी। यहां भी घरो की छत्तो पर बेशूमार लोग थे। जय भवानी के प्रकट होने पर युवाओ का जोश सब कुछ भुला देने वाला था। आपके तनाव और भेजे का शोर कहीं रह जाता है।

 


अगले दिन पहले जस्सूसर गेट पर फाग उत्सव पर मुन्ना सरकार और मास्टर नानू अपनी आवाज के जलवे बिखेर रहे थे। मुंबईया के शो की तरह उनकी प्रस्तुत थी। मुन्ना सरकार और मास्टर नानू की जुगलबंदी कमाल की थी। मै भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात बतात हूं....... गीत पर तो उन्होने कमाल कर दिया। युवाओ की भीड उनके स्वरो पर झूम उठी। यहां से निकल की हम पहुंचे नत्थुसर गेट पर जहां पर भांग की कुल्फी, भंग की कचाडी, भुजिये, सब कुछ भांग का। बहुत बडा बाजार और उस बाजार में उतनी ही बडी भीड। हम भीड में आगे चलते गये। एक गाडे पर ग्रामीण वेषभूषा धरे युवा बैठे थे। हमने युवाओ के साथ गाढे पर बैठकर एक तस्वीर ली। इसके आगे एक मंडली चंग की थाप पर फिल्मी गाने गाकर झूम रही थी। थोडो और आगे चले तो हमारे उपर पानी एक गुब्बारा आकर गिरा। दरअसल आगे बच्चे लोगो पर पानी के गुब्बारे फेंक रहे थे। आगे सडक पर एक भूतनी बैठी हुई थी। एक बार तो हम डर गये। फिर भूतनी के साथ एक तस्वीर उतारी। आगे तो भाई बारहगुवाड चौक् था। बीकानेर होली की राजधानी। व्यासो की गेवर से अटा हुआ था। युवाओ के शोर में कुछ सुनाई नही दे रहा था। यहां भेजे का शोर फुर्रर हो जाता है। धक्का मुक्की से आगे निकल की कोशिश की परन्तु नहीं निकल पाये। दूसरे रास्ते से निकले। सदाफते पर लगे मंच पर फिल्मी गाने गाये जा रहे थे। मौका देखकर हमने भी अपना जैसा था वैसा गला साफ किया। भीड से निकल कर वापिस नत्थुसर गेट आयें। यहां पर हमने भी जोशी आईसक्रीम की आईसक्रीम का स्वाद ले ही लिया। आईसक्रीम का स्वाद लेते हुए हम पुष्करणा स्टेडियम तक पहुंचे तो होली पीछे छुट गयी। भेजा फिर शोर करने लगा। अब लग घर जाकर सो जाना चाहिए। तडके 3.00 बज रहे थे। 


Monday, February 26, 2024

क्रिकेट की एक स्‍कूल है आर. अश्विन





इग्‍लैण्‍ड जिस बैजबॉल की रणनीति के साथ भारत आया था उस बैजबॉल पर आर अश्विन की बॉल भारी पडी । अश्विन ने दूसरे टेस्‍ट में अपना बहुप्रतिक्षित ५००वां विकेट भी ले लिया। अश्‍विन मुरलीधरन के बाद दूसरे सबसे तेज ५०० टेस्‍ट विकेट लेने वाले खिलाडी है। ५०० वां विकेट लेने केवल एक विकेट भर लेना नही है बल्कि  सालो तक अंतराष्‍ट्रीय क्रिकेट में अपने आपको बनाये रखना कोई आसान काम नही है। क्रिकेट इस सुनहरे पल को पाने के लिए उसने कई अनमोल क्षणो को अपने क्रिकेट कैरियर में जीया है। ५००वां टेस्‍ट विकेट किसी भी गेंदबाज को क्रिकेट की एक स्‍कूल बनाता है जो कई युवाओ के लिए मिसाल बनता है।

क्रिकेट के इस महान गेंदबाज की उपलब्धि पर क्रिकेट लीजेण्‍ड सुनील गावस्‍कर ने लिखा कि यह एक महान पल है। ऐसा बिरले खिलाडी ही कर सकते है और अश्विन उन चुनींदा गेंदबाजो में शामिल है जिन्‍होने यह कारनामा किया है। सबसे बडी बात है कि उसने स्पिन गेंदबाज होकर यह मुकाम हासिल किया है। यह मुकाम हासिल करके उसने दुनिया में भारत के नाम को और उंचा किया है परन्‍तु उसे ५०० वां टेस्‍ट विकेट हासिल करने के बाद वो सम्‍मान नहीं मिल पाया जिसका वो हकदार है। अश्विन भारतीय टीम के कप्‍तान बनने के हकदार थे परन्‍तु वो यह सम्‍मान हासिल नही कर पाये। गावस्‍कार ने यह भी कहा जिस समय भारत की एक से ज्‍यादा टीमे खेल रही थी उस समय अश्विन को कप्‍तान बनने का सम्‍मान दिया जा सकता था। इससे पहले कपिल देव ने ४०० विकेट लेने का मुकाम हासिल किया था उन्‍हे कप्‍तान बनने का सौभाग्‍य मिला था।  अनिल कुंबले भी भारत की कमान संभाल चुके है परन्‍तु आर अश्विन यह सम्‍मान हासिल नही कर पाये। सुनील गावस्‍कर ने कहा कि अश्विन की इस उपलब्धि पर हमें नाच कूद कर खुशी मनानी चाहिए।

अश्‍विन ने भी इस मुकाम को हासिल करने के लिए सावधानी से कदम रखे। उसकी पत्नि लिखती है कि हमने इस पल का बहुत लंबा इंतजार किया। इससे पहले हमने मिठाईयां और आतिशबाजी मंगाकर रखी थी परन्‍तु अश्विन ४९९ विकेट पर ही रूक गये। इस कारण मिठाईयां वैसे ही बांटनी पडी। आर अश्विन ने भी एक अखबार में लिखा कि उसे अपने कैरियर में बहुत उतार चढाव देखे है। कोरोना  से पहले वह अपने कैरियर के सबसे बुरे दौर से गुजरा था। उस समय वो अपने प्रदर्शन को दोहरा नही पा रहा था। उसे टीम से बाहर कर दिया गया था। उसे वापसी की कोई राह नही मिल रही थी। ऐसा लग रहा था कि उसका कैरियर खत्‍म हो जायेगा। आईपीलएल में उसका प्रदर्शन गिर रहा था। यह उसके कैरियर का सबसे बुरा दौर था। उसने लिखा किे वो खेल से बहुत प्‍यार करता था परन्‍तु वो खेल को खोना नही च‍ाहता था। इस बुरे दौर में वो लगातार चोटिल भी हो रहे थे। वो एक अंधरे गुफा में था। उसने खेल को नये नजरिये से देखा। उसने दूसरे मैचो के वीडियो देखे और वीडियो देखकर अपने आप में सुधार किया और २०२० के बाद फिर मैदान में वापसी की। भारतीय कप्‍तान रोहित शर्मा कहते है कि आप आर अश्‍विन को हर मैच में अलग प्रकार से गेंद फेकते देखते है। आपको हर मैच में नया अश्विन मिलता है। यही अश्‍विन की विशेषता है कि वो हर बार नये तरीके से गेंद फेकता है। अपने इसी प्रयोग के कारण उसने कैरम बॉल का ईजाद किया। कैरम बॉल से कई बललेबाज  गच्‍चा खा जाते है।  

 

आर अश्विन ने ५०० विकेट का मुकाम हासिल करने के साथ ही ईग्‍लैण्‍ड के विरूद्ध १००० से अधिक रन और १०० विकेट हासिल किये। वो यह मुकाम हासिल करने वाला अकेला भारतीय खिलाडी है और ५०० विकेट हासिल करने वाला  मात्र दूसरा भारतीय खिलाडी है। इतनी बडी उपलब्धि हासिल करने के बाद गावस्‍कर की बात में दम लगता है कि ऐसे खिलाडी को कप्‍तानी का सम्‍मान भी मिलना चाहिए। हांलाकि दुनिया में इतनी बडी उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाडियो को कप्‍तानी का सम्‍मान बहुत कम हासिल हुआ है। मुरलीधर और शेन वार्ने जो दुनिया के सबसे महानतम गेंदबाज है जो ८०० और ७००विकेट ले चुके है परन्‍तु कभी भी अपने देश की टीम के कप्‍तान नही बन पाये परन्‍तु इस आधार पर अश्विन के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता है। आर अश्विन भी भारतीय टीम का कप्‍तान बनने का सम्‍मान हासिल करने के हकदार थे। यह अलग बात है कि उन्‍होने टीम में बने रहने के लिए भी संघर्ष किया। बदलते दौर में भी अपनी प्रासंगिकता बनाये रखने के लिए अश्विन की प्रशंषा होनी चाहिए और जिस प्रकार वो हर बार अपनी गेंदबाजी में प्रयोग करते है वह युवाओ के लिए सीखने की जरूरत है। भारत को इस महान गेंदबाज पर गर्व करना चाहिए जिसने देश को दूसरी बार ५०० का आंकडा छुने का गर्व दिलाया है।

सीताराम गेट के सामने, बीकानेर ९४१३७६९०५३

Tuesday, February 20, 2024

ये मुलाकात तो इक बहाना हैै.............




इन दिनो हवाऐं चलने लगी है। फागण नही आया है परन्‍तु यह फागण की आहट है। छत्‍त पर बने कमरो के आगे मिटटी जमा होने लगी है। हवाओ के साथ मिटटी भी उडकर आने लगती है। सर्दीया अबकी बार कब आयी और कब गयी पता ही नहीं चला। सर्दियो में छुटटी वाले दिन छत्‍त पर बैठ कर एक दो किताबे पढ लेता हुं। इस बार रक्सिन बाण्‍ड की आत्‍मकथा की ई बुक मंगवायी थी परन्‍तु पढ नही पाया। उसकी रीडिंग जारी है। इन सर्दियो मे आफिस में इतना काम रहा कि किताबे पढने के लिए समय ही नहीं निकाल पाया। शनिवार हो या रविवार मेरे को आफिस जाना ही पडता था। धूप कमरे की देहरी पार कर मेरे पलंग तक आ जाती थी। ऐसा लगता था कि वो मुझे ढुंढ रही है। एक दो बार धूप में बैठने का मौका मिला तो आफिस से कॉल आने के कारण जाना पडा। कमरे की देहरी पार कर आयी हुयी धूप को देखकर लगता था कि वो कह रही है –

ये मुलाकात तो ईक बहाना है,

यह सिलसिला पूराना है।

हमारे जिला कलेक्‍टर श्री भगवती प्रसाद कलाल सर का ट्रान्‍सफर हो गया तो आज मै समय निकाल कर यह ब्‍लॉग लिख रहा हूं। कलाल सर का मेरे लिए यह मैराथन कार्यकाल था। कलाल सर के कार्यकाल में मैने काम के प्रति नये द्रष्टिकोण को देखा या यूं कहे काम के ब्रह्म को जाना। कलाल सर के लिए सरकार द्वारा निर्धारित मानदण्‍ड काफी पीछे छुट जाते थे। वे काम को मानदण्‍ड की द्रष्टि से नही बल्कि उसके निस्‍तारण की दृष्टि से देखते थे। इसके लिए चाहे कितना ही समय देना पडे वो देते थे। सुबह साढे नौ से रात को साढे दस ग्‍यारह बजे तक लगातार वे आफिस चलाते थे। लक्ष्‍य एक ही था काम का निस्‍तारण और जनता को राहत। मै भी उनके निर्देशो की पालना में दिन रात लगता रहता था। सुबह शाम, सोमवार मंगलवार, शनिवार रविवार या होली डे किसी चीज का ख्‍याल नही रहता था। इसके साथ होने वाले तनाव को वो सहज ढंग से रिलिज कर देते थे। एक बार कोर्ट में एक महिला ने भरे कोर्ट में मेरी ओर ईशारा कर कह दिया कि मेरी फाईल का निस्‍तारण नही हुआ तो मै आपके घर चली आउंगी। ऐसी तनावपूर्ण स्थिति में भी उन्‍होने बिना किसी दबाव में आये न्‍याय किया।

मेरे ख्‍याल से  कलाल सर काम करने की एक किताब है जिसको पढकर काफी कुछ सीखा जा सकता है जो आपके जीवन में भी बहुत काम आ सकती है। कलाल सर के हार्ड बवर्क के दौरान भी मैने समय निकाल कर उनके कार्यकाल में तीन किताबे लिख दी । दो रिलिज हो चुकी है और एक नयी किताब यह ब्‍लाग आपके पास आने तक आ जायेगी। मेरी लेखन की प्रतिभा को पचानते हुए उन्‍होने मुझे गणतंत्र दिवस पर जिला स्‍तर पर सम्‍मानित किया। उन्‍होने मुझे लिखने के लिए हमेंशा प्रोत्‍साहित किया। कलाल सर के साथ अनमोल समय व्‍यतीत किया या यूं कहे क्‍वालिटी टाईम स्‍पेंड किया। अब नम्रता जी वृष्णि के साथ काम करना है। देखते है –


इन दिनो शहर मे ओलम्पिक सावे की धूम  है। मेरे ननिहाल में भी शादी थी तो तीन दिन शादी में व्‍यस्‍तता रही है। शादी में पूरा आनंद लिया। ऐसा लगता है कि इस समय जमकर आनंद ले लूं या यूं कहे आनंद को लूट लूं। जो संकोचवश नही कर पाया वो सब कर लूं। शादी में काफी लोगो से मिलना हुआ। कुछ और शादिया भी अटैण्‍ड की और उसमें भी कई पूराने दोस्‍त मिले। रमक झमक के प्रहलाद ओझा का निमंत्रण आया हुआ था परन्‍तु जा नही पाया। इस सावे में मित्रो के परिवारजनो की शादीयो में शामिल हुआ। हर शादी में उत्‍सव की तरह आनंद लिया।


अब मेरी किताब की बात। इस साल मेरी एक ओर बच्‍चो की किताब आ रही है। यह राजस्‍थानी भाषा में है। मुझे बच्‍चो के लिए लिखने में मजा आता है और बच्‍चे पढकर खुश भी होते है। काफी बच्‍चे मेरी किताबो के कारण मुझे प्‍यार करते है। मुझे अच्‍छा लगता है। राजस्‍थानी भाषा की किताब है। बच्‍चो के लिए सरल सहज भाषा की किताब। एक ऐसी किताब जिससे बच्‍चे अपने मन की दुनिया पाते है। 


अपने तरह की अनोखी किताब है। जल्‍द ही आपके सामने आयेगी – खेलरां रो खेल। यही टाईटल है मेरी नयी किताब का। आज बस इतना ही । फिर कभी नयी बात। आपके साथ।


Wednesday, January 31, 2024

खेलो इंडिया से कितना खेला इंडिया

 


देश में सालो तक खेलो के राष्‍ट्रीय स्‍तर के बडे आयोजनो में राष्‍ट्रीय खेल सबसे उपर रहे है। राष्‍ट्रीय खेल के आयोजन में अंतराल आता रहा है परन्‍तु इस समय देश में खेलो इंडिया की धूम है। भारत सरकार का यह कार्यक्रम युवाओ में खासा लोकप्रिय हो रहा है। इसी के तहत तमिलनाडु की मेजबानी में खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स का छठा संस्‍करण आयोजित किया गया जिसमे देश भर के ५६०० से भी ज्‍यादा खिलाडियो ने हिस्‍सा लिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेलो इंडिया देश में खेलो के प्रति युवाओ में विश्‍वास जगाने में कितना बडा काम कर रहा है। युवा इसे अपनी उम्‍मीदो से जोडकर देख रहे है। खेलो इंडिया ने युवाओ को न केवल अवसर प्रदान किये है बल्कि मिलने वाली सुविधाओ में भी ईजाफा किया है।

तमिलनाडु में खेला इंडिया यूथ गेम्‍स का छठा संस्‍करण आयोजित किया गया। इन खेलो मे महाराष्‍ट्र, हरियाणा और तमिलनाडु के एथलीट छाये रहे । खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स २०२३ में महाराष्‍ट्र चैम्पियन बना था। इस बार केआईवाईजी २०२४ में कुल २६ खेलो में ९३३ पदक दांव पर थे जिसमें २७८ स्‍वर्ण पदक, २७८ रजत और ३७७ कास्‍यं पदक शामिल है। स्‍क्‍वेश को पहली बार केआईवाईजी में शामिल किया गया। इसमें ३६ राज्‍यो और केन्‍द्र शासित प्रदेशो की टीमें भाग लेती है। इसमें सबसे बडा दल मेजबान तमिलनाडु का रहा जिसमें ५५९ एथलीट शामिल थे जबकि तीन बार के चैम्पियन महाराष्‍ट्र के दल में ४१५ और दो बार के चैम्पियन हरियाणा के दल में ४९१ एथलीट शामिल थे। हरियाणा छोटा राज्‍य होने के बावजूद दो बार चैम्पियन है जो यह बताता है कि इस राज्‍य में खेलो का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर कितना मजबूत है। केआईवाईजी टीम चैम्पियशिप प्रारूप में खेला जाता है जिसमें एथलीटो द्वारा जीते गये पदक उनसे सम्‍बन्धित राज्‍य या केन्‍द्र शासित प्रदेश की समग्र पदक तालिका में जोडे जाते है और जो टीम सबसे ज्‍यादा पदक जीतती है, उसे प्रतियोगिता का चैम्पियन घोषित किया जाता है।

खेलो इंडिया वर्ष २०१७-१८ में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एथलीटो को जमीनी स्‍तर पर सुविधाऐ और अवसर उपलब्‍ध करान के उद्धेश्‍य से शुरू किया गया। खेलो इंडिया भारत सरकार की युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजना है। इसके अन्‍तर्गत खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्‍स और खेलो इंडिया विंटर गेम्‍स आयोजित किये जाते है। इससे जुडे खिलाडियो को खेला इंडिया एथलीट के रूप में पहचान मिली है। इससे निकले ३००० से ज्‍यादा एथलीट भारतीय खेल प्राधिकरण के विभिन्‍न केन्‍द्रो पर प्रशिक्षण प्राप्‍त कर रहे है। इस प्रशिक्षण  में उपकरण , आहार और शिक्षा हेतु सहायता के अतिरिक्‍त १०,००० रूपये भत्‍ता दिया जाता है। खेलो इंडिया भारत में खेलो के विकास के लिए महत्‍ती भूमिका निभाता हुआ दिख रहा है। एशियाई खेलो में भारत की पदक तालिका तीन अंको में पहुंचाने में कहीं न कहीं खेलो इंडिया का योगदान है। भारतीय एथलीटो ने एशियाई खेलो में जिस प्रकार का खेल और जज्‍बा दिखाया वो खेलो इंडिया के कारण ही संभव हो सका है। भारतीय एथलीटो को दिया गया प्रशिक्षण मैदान में उनके प्रदर्शन से दिख रहा है। राष्‍ट्रकुल खेलो और ओलम्पिक  में भी भारतीय एथलीटो का प्रदर्शन पूर्व के प्रदर्शनो से काफी बेहतर रहा है। इसके लिए भारतीस एथलीटो ने मिली सुविधाओ का खूब लाभ उठाया जो उनकी सफलता में दिखाई दिया।

खेलो इंडिया योजना युवाओ के बीच लोकप्रिय होती दिख रही है। युवाओ को निश्चित रूप से इससे अवसर प्राप्‍त हुए है। खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्‍स के अलग अलग आयोजन होने से युवाओ के लिए अवसर बढे है। खेलो का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर पहले से बेहतर हुआ है परन्‍तु अभी भी इस क्षेत्र में काम की जरूरत है। ठेठ ग्रामीण स्‍तर तक खेलो के इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को बेहतर बनाने की आवश्‍यकता है। कई गांवो में खेल प्रतिभाऐं है परन्‍तु इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के अभाव में ये प्रतिभाऐ उभरने से पहले ही खत्‍म हो जाती है। सोशल मिडिया के जरिये कई बार गांव की लडकियो को अपने गांव मे खेलो में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन में करते हुए देखा जा सकता है। किसी भी बडे प्रतिभा खोज तलाश कार्यक्रम में प्रतिभाऐं गांव में ही मिलती है। तीरंदाज लिम्‍बाराम ठेठ गांव की ही प्रतिभा थी। देश की कई यूनिवर्सिटीज में भी खेल सुविधाओ और साधनो का अभाव है इस कारण प्रतिभाशाली खिलाडी आगे बढने का सपना वहीं खत्‍म कर देते है। खेलो इंडिया के माध्‍यम से अंतिम छोर तक खेल सुविधाओ का विस्‍तार करने की आवश्‍यकता है।

खेलो इंडिया योजना के तहत स्‍थानीय खेलो को भी महत्‍व दिया जा रहा है जिसमें गतका, कलारीपयटु और मलखम्‍ब शामिल है। खेलो इंडिया से निश्चित रूप से इंडिया खेला है और काम्‍याबी के सा खेला है। अभी खेलो इंडिया को पांच से सात साल ही हुए है। अभी जो परिणाम मिले हुए उसे शुरूआती माने जा सकते है परन्‍तु अगले पांच वर्षो में बडे परिणामो की दरकार रहेगी। हाल के परिणामो से माना जा सकता है कि खेलो इंडिया अपने उद्धेश्‍यो में सफल हो रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स की लोकप्रियता जिस प्रकार से बढी है उससे युवाओ खेलो की तरफ आकर्षित हुए है। तमिलनाडु में इन खेलो का जारेदार आयोजन हुआ और सबसे बडी बात इसमें लगभग सभी राज्‍यो और केन्‍द्र शासित प्रदेशो की टीमो ने भाग लिया। 

खेलो इंडिया की सफलता और बडी हो जायेगी तब अंतिम छोर तक खेल सुविधाऐं पहुंच जायेगी। फिलहाल खेलो इंडिया यूथ गेम्‍स अपने छठे संस्‍करण में ही सफल है परन्‍तु यह भी सच है कि पहले पांच प्रदेशो की टीमो के स्‍वर्ण पदको की संख्‍या दहाई तक पहुंच सकी है। इस पदक तालिका से पता लगाया जा सकता है कि खेलो में कहां पर और अधिक ध्‍यान देने की जरूरत है। खिलाडियो का जोश और खूमार खेलो इंडिया के ध्‍वज वाहक है।

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सीताराम गेट के सामने, बीकानेर ९४१३७६९०५३