Sunday, August 20, 2017

कवि‍ता
सन्‍यासि‍यों का झुण्‍ड बाते करता है

सन्‍यासि‍यों का झुण्‍ड अपने आश्रम में
गोल घेरे में बैठा हुआ
गेहरूऐं वस्‍त्रो को संभालते हुए
अपने सपाट सि‍र पर हाथ फेरते हुए
बाते कर रहा है।

गेहरूऐं वस्‍त्रो ने वि‍षय आसक्‍ति‍ से
उन्‍हे दूर कर दि‍या है
सपाट सि‍र ने उन्‍हे कर्मकाण्‍डो से
मुक्‍त कर दि‍या है
फि‍र भी
वे अपने आश्रम में एक झुण्‍ड मे
बातें कर रहे है

उनके चारो ओर शून्‍य है
बाहर भी और भीतर भी
एकाकार होना चाहते है वे शून्‍य में
अपने को वि‍लीन कर देना चाहते है
शून्‍य में
पर
कर नहीं पा रहे है वे वि‍लीन अपने आपको

कोने में आसन पर गुरू बैठे है
बि‍लकुन मौन
वो एकाकार हो गये है
बाहर से और भीतर से
इसीलि‍ए वो बातो में शामि‍ल नहीं है
परन्‍तु
सन्‍यासि‍यों का झुण्‍ड गोल घेरे में
आश्रम में बैठा हुआ

बाते कर रहा है।